रेडियो दिवस और भारत मे रेडियो

वैश्विक स्तर पर जन जागरूकता के लिए दिवस मनाने की परंपरा रही है, जिस पर लक्ष्य और विषय निर्धारित कर आयोजन किए जाते हैं, पर रेडियो के पास अपना कोई दिवस न था। तो इस कमी को पूरा करने की दृष्टि से 20 अक्टूबर, 2010 को स्पेनिश रेडियो अकादमी के अनुरोध पर स्पेन ने संयुक्त राष्ट्र में रेडियो को समर्पित विश्व दिवस मनाने के लिए सदस्य देशों का ध्यानाकर्षण किया। जिसे स्वीकार कर संयुक्त राष्ट्र के शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने पेरिस में आयोजित 36वीं आमसभा में 3 नवंबर, 2011 को घोषित किया कि प्रत्येक वर्ष 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाएगा। रेडियो रूस दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी रेडियो प्रसारण कम्पनियों में से एक है। रेडियो रूस ने आज से 80 साल पहले अपने प्रसारण शुरू किए थे। आज रेडियो रूस के प्रसारण दुनिया की 44 भाषाओं में दुनिया के सभी महाद्वीपों के निवासी सुनते हैं।

विश्व रेडियो दिवस मनाने की शुरुआत हाल ही में की गई है। यूनेस्को ने सन् 2011 में ही विश्व-स्तर पर रेडियो दिवस मनाने का निर्णय लिया। 13 फ़रवरी का दिन ‘विश्व रेडियो दिवस’ के रूप में इसलिए चुना गया क्योंकि 13 फ़रवरी सन् 1946 से ही रेडियो यू०एन०ओ० यानी सँयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अपने रेडियो प्रसारण की शुरुआत की गई थी।

रेडियो हमारा मनोरंजन करता है, हमें शिक्षित करता है, हमें सूचनाओं और जानकारियों से लैस करता है और सारी दुनिया में लोकतान्त्रिक बदलावों को प्रोत्साहित करता है। यूनेस्को के संचार और सूचना विभाग की प्रमुख मीर्ता लॉरेन्सो ने रेडियो रूस से बातचीत करते हुए कहा कि दुनिया के 95 प्रतिशत निवासी आज भी रेडियो सुनते हैं। रेडियो दुनिया का सबसे सुलभ मीडिया है। दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर रेडियो सुना जा सकता है। अनपढ़ लोग भी, वे लोग भी, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते रेडियो सुनकर सारी जानकारियाँ पा जाते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में रेडियो सम्पर्क-साधन की भूमिका भी निभाता है और लोगों को सावधान और सतर्क करता है। कोई भी प्राकृतिक दुर्घटना होने पर बचाव-कार्यों के दौरान भी रेडियो बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यूनेस्को ने रेडियो के उस महत्त्व को रेखांकित करने के लिए ‘विश्व रेडियो दिवस’ मनाना शुरु किया है, जो पिछले सौ सालों से वह मानवजाति के हित में करता रहा है।

‘विश्व रेडियो दिवस’ के अवसर पर पेरिस स्थित यूनेस्को के मुख्यालय में एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में अनेक गोलमेज़ चर्चाएँ कराई जा रही थी, जिनमें उन फ़ौरी समस्याओं पर भी विचार किया गया जो आज रेडियो के विकास में सामने आ रही हैं। मुख्य तौर पर चर्चा के लिए तीन विषय चुने गए थे । ये विषय थे —

* बच्चों और युवा वर्ग के लिए रेडियो

* रेडियो-पत्रकारों की सुरक्षा

* शार्ट-वेव रेडियो प्रसारणों का भविष्य।

विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर रेडियो रूस और दूसरे बड़े रेडियो स्टेशनों ने यूनेस्को-मुख्यालय में ही एक छोटा-सा रेडियो-स्टूडियो बना लिया है। आज सारा दिन इस स्टूडियो से दुनिया के प्रमुख रेडियो स्टेशन अपने-अपने विशेष-कार्यक्रम प्रसारित कर रहे हैं। यूनेस्को की प्रवक्ता पलीना कवाल्योवा ने बताया कि यूनेस्को-मुख्यालय में ऐसा पहली बार हो रहा है। पलीना कवाल्योवा ने कहा : आज रेडियो रूस, बी०बी०सी०, चाइना इंटरनेशनल रेडियो, स्पेन और मोंटे-कार्लो रेडियो, आर०एफ़०आई० और रेडियो ओरियंट जैसे रेडियो स्टेशन एक-दूसरे के साथ पास-पास खड़े होकर अपने-अपने प्रसारण कर रहे हैं। यह एक अनूठा अवसर है। पहली बार यूनेस्को में ऐसा हो रहा है। हमने यह कोशिश की थी कि सारी दुनिया के रेडियो प्रसारक यहाँ आएँ… और हमारी यह कोशिश सफल रही। इससे हमारा मुख्य उद्देश्य भी पूरा होता दिख रहा है। रेडियो के महत्त्व की ओर हम विश्व-समुदाय का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे ताकि सारी दुनिया के रेडियो स्टेशन भविष्य में आपस में एक-दूसरे के साथ सहयोग करें।

उल्लेखनीय है कि 13 फरवरी को ही संयुक्त राष्ट्र की ‘रेडियो यूएनओ’ की वर्षगांठ भी होती है, क्योंकि 1946 को इसी दिन वहां रेडियो स्टेशन स्थापित हुआ था। और तब पहली बार 13 फरवरी, 2012 को यह विश्व रेडियो दिवस उमंग-उत्साह पूर्वक पूरी दुनिया में मनाते हुए रेडियो के सफरनामे को याद किया गया। इस आयोजन में विश्व की प्रमुख प्रसारक कंपनियों को बुलाया गया था जिसमें 44 भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी एवं पुरानी कंपनी रेडियो रूस भी शामिल हुई थी।

रेडियो एक शक्तिशाली माध्यम है। आज के डिजिटल संचार की दुनिया में भी रेडियो किसी अन्य मीडिया की तुलना में अधिक लोगों तक पहुंचता है।। वह अत्यावश्यक सूचनाएं प्रेषित करता है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता फैलाता है। और यह एक ऐसा व्यक्तिगत और परस्पर संवादात्मक मंच है जहां लोग अपने विचारों, चिंताओं और शिकायतों को प्रकट कर सकते हैं। रेडियो एक समुदाय का सृजन कर सकता है।

“भारत मे रेडियो”

भारत में रेडियो का चलन बरसों पुराना है. प्राचीन समय में रेडियो एक ऐसा यंत्र था, जिसे लोग बहुत सी चाव से सुना करते थे. क्योकि इसके माध्यम से लोगों तक देश और दुनिया की खबरें पहुंचाई जाती थी. साथ ही यह उस समय के लोगों के लिए मनोरंजन का साधन भी था.

” कब आया रेडियो”

भारत में रेडियो को सबसे पहले

* मद्रस प्रेसीडेंसी क्लब 1924 में लेकर आया था.

* क्लब ने 3 साल रेडियो प्रसारण पर काम किया था, लेकिन आर्थिक मुश्किल के चलते 1927 में क्लब ने इसे बंद कर दिया था. इसी साल 1927 में कुछ बोम्बे के व्यापारियों ने भारतीय प्रसारण कंपनी को बोम्बे और कलकत्ता में शुरू किया. ये कंपनी भी 1930 में फ़ैल हो गई और फिर 1932 में भारत सरकार ने इसकी बागडोर अपने हाथों में ले ली और एक अलग से भारतीय प्रसारण सेवा नाम का विभाग आरम्भ कर दिया. 1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो (AIR) रख दिया गया, जिसे संचार विभाग देखा करता था. AIR को नियंत्रित निर्देशक जनरल करता था, जिसे उप निर्देशक और मुख्य अभियंता मिल कर सहायता करते थे.

आज के समय में भी यह रेडियो लोगों के जीवन का एक हिस्सा बना हुआ है. इसके चलते मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संचालित रेडियो शो भी सन 2014 से शुरू हुआ है, जिसमें लोग मोदी जी के वचनों को सुनने है.

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