जटायू पार्क: राम के पक्षी दूत

केरल के कोल्लम जिले के चदयामंगलम गांव में जटायु नेचर पार्क लोगों के लिए बनाया गया है। इसका निर्माण केरल सरकार करवा रही है। कोल्लम से जटायु नेचर पार्क की दूरी करीब 28 किमी है।

जिसमें रामायण के जटायु की कहानी मूर्त रूप लेगी। माना जाता है कि यही वो स्थान है जहां जटायु ने रावण से युद्ध किया और उल्लेखनीय है कि जटायु ने ही श्रीराम को बताया था कि रावण ने सीता का हरण कर लिया। इसके पश्चात जटायु ने प्राण त्याग दिए तथा श्रीराम व लक्ष्मण ने उसका अंतिम संस्कार किया। इस स्थान पर उनका विशाल स्कल्पचर बनाया जा रहा है। पर्वत पर इसकी लंबाई 200 फीट, चौड़ाई 150 फीट और ऊंचाई 70 फीटा होगी। 65 एकड़ के इस जटायु पर्वत की चोटी पर चट्टानों को तराश कर जटायु के पंख बनाए गए है। उसी जटायु के जिसने सीता के अपहरण करने वाले रावण के साथ आकाश में युद्ध किया था और रावण को अपहरण करने से रोका था। बदले में रावण ने जटायु के पंख काट दिए थे, जिससे वह जमीन पर आ गिरा था।

इसके निर्माण में सात साल का समय लगा और करीब 100 करोड़ रुपए लागत आई। केरल पर्यटन विकास निगम और फिल्म निर्देशक राजीव अंचल की परिकल्पना है जटायु पर्वत। पहाड़ की चट्टान पर ही बगीचा बनाया गया है। रेल वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की गई है, आर्गेनिक फार्मिंग की व्यवस्था भी है और कुल मिलाकर तमाम आधुनिक सुविधाएं यहां मौजूद है। स्विटजरलैंड से मंगाए गए रोप वे लगाए गए है। जिनमें बैठकर ऊपर पहाड़ी पर जाते हुए आकाश में उड़ने का आभास ले सकते है। करीब 1000 फीट ऊंची पहाड़ी से आप घाटी के विशाल जंगलों को देख सकते है। जटायु की प्रतिमा बनाने में चट्टानों के अलावा कांक्रीट का उपयोग भी किया गया है। आप यहां बगीचे की सैर करने के अलावा म्युजियम में भी ज्ञानवृद्धि कर सकते है और यहां लगातार होने वाले रंगमंच के कार्यक्रम भी देख सकते है। 400 रूपए और टैक्स के भुगतान से आप रोप वे की यात्रा का अंतर्राष्ट्रीय स्तर का लुत्फ ले सकते है। इसके अलावा आप चाहे तो यहां हेलीकॉप्टर से भी जा सकते है। कोलम जिले के चडायू मंगलम नगर के पास यह पर्यटन स्थल लोगों को आकर्षित कर रहा है। पर्यटन विकास निगम का इस बात का ख्याल रखा है कि यहां ऐसी कोई गतिविधि न हो, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे। इसलिए यहां सौर ऊर्जा का भी भरपूर उपयोग किया गया है। आर्गेनिक खेती के उत्पाद भी यहां से खरीदने की व्यवस्था की जा रही है। यहां आकर पर्यटकों को एहसास होगा कि रावण के पुष्पक विमान को रोकने के लिए जटायु ने युद्ध किया होगा तो क्या हालात हुए होंगे। राजीव अंचल का मानना है कि यह स्थान प्रकृति, मानव, पक्षी और अन्य प्राणियों के बीच सामंजस्य का प्रतिक है

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