ईसाई धर्म का इतिहास और महत्‍वपूर्ण तथ्‍य | ईसाई धर्म पर निबंध

ईसाई धर्म विश्व प्रसिद्द धर्मों में से एक है। इस धर्म को मसीही धर्म और क्रिस्चियन धर्म के नाम से भी जाना जाता है। यह धर्म इब्राहीमी एक ईश्वर को मानने वाला धर्म है। यह धर्म यहूदी धर्म के बाद आता है। इस धर्म के प्रवर्तक यीशु मसीह हैं। ईसाई धर्म के अनुयायी यीशु मसीह की शिक्षा का अनुसरण करते हैं।

धर्म से भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाने के लिए यीशु मसीह ने इस धर्म की स्थापना की। यहूदी धर्म के प्रचारकों के द्वारा इस धर्म का उत्थान हुआ। यीशु मसीह और उनके बारह शिष्य यहूदी ही थी। इस धर्म में यीशु मसीह ने लोगों को कई सारे उपदेश दिए हैं।

◆ समुदाय : ईसाई धर्म को बहुत से समुदायों में बांटा गया है जैसे  -कैथोलिक, प्रोटैस्टैंट, आर्थोडोक्स, एवानजिलक आदि।

◆ ईसाई धर्म का इतिहास :- यीशु मसीह के इस धरती पर जन्म लेने से पूर्व आरजकताएँ, मार-काट मची हुई थी। सब जगह बुरा हाल था। लोग बहुत परेशान थे। यीशु मसीह के जन्म के समय हीरोद नामक रोमन शासक का फिलिस्तीन पर शासन था। उसी समय यीशु मसीह का जन्म होने वाला था। हीरोद को पता चला कि दैवीय शक्तियुक्त बालक जन्म लेने वाला है और वह उसकी तानाशाही का अंत करेगा। इस डर से हीरोद ने वहां के सारे नवजात शिशुओं को मरवा दिया। परन्तु यीशु मसीह बच गए। यीशु मसीह इतने प्रभावशाली व्यक्ति बन गए कि लोगों ने पाखंडी – ढोंगी लोगों के उपदेशों को सुनना बंद कर दिया और यीशु मसीह की शिक्षा का अनुसरण करने लगे। इससे अन्य लोग जलने लगे और यीशु मसीह को मारने का षड्यंत्र रचने लगे। यीशु मसीह को इन सब षड्यंत्रों का आभास पहले ही हो गया था, उन्होंने कहा कि ये लोग मुझे दो दिन बाद क्रूस पर चढ़ा देंगे। यीशु मसीह एक ऐसे चरित्र थे कि लोग उनसे प्रेरित होते थे। उन्होंने लोगों के दुखों को दूर करने के लिए कई सारे चमत्कार किये। उन्होंने लोगों को कई रोगों से मुक्त किया। इसीलिए लोग उनसे प्रेम करने लगे थे और दूसरी तरफ कुछ लोग जलने लगे थे। पुरोहित वर्ग के लोग यीशु मसीह से नफरत करने लगे थे।

यीशु मसीह के एक साथी ने विश्वासघात किया और उन्हें क्रूस पर चढ़वा दिया गया। अंतिम समय में यीशु ने ईश्वर से कहा कि ये आत्मा आपको समर्पित है और लोगों का भला करना। मानव कल्याण करते हुए यीशु मसीह ने अपना बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि –

“मेरे शिष्यों में से ही कोई विश्वासघात करेगा, जो तुम लोग भोजन कर रहे हो वह मेरे शरीर के टुकड़े हैं और जो तुम पानी पी रहे हो वो मेरा रक्त है।”

ईसाई धर्म के मूल्य :

यीशु मसीह ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा है कि मनुष्य को दूसरों की भावनाओं को समझना चाहिए, दूसरों के दुःखों को समझना चाहिए और ह्रदय में करुणा का भाव होना चाहिए। वही व्यक्ति परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। यीशु मसीह ने कुछ मूल्यों के बारे में बताया है जो मानवता को प्रदर्शित करता है।

1. शत्रुओं से प्रेम करो – यीशु मसीह ने बताया है कि मनुष्य में स्थिरता होनी चाहिए, एकाग्रता होनी चाहिए, क्योंकि वे ईश्वर का ही अंश हैं। उन्होंने कहा है कि सबसे प्रेम करो। शत्रुओं से भी प्रेम करो, उनसे मित्रता करो। मित्रों से तो आप अच्छा व्यवहार करते ही हैं, शत्रुओं से भी अच्छा व्यवहार करो।

2. दान – इस धर्म में दान पर विशेष महत्त्व दिया गया है और बाइबिल में भी बताया गया है कि “दान दिखाने की वस्तु नहीं है।”

3. प्रार्थना – बाइबिल के अनुसार प्रार्थना भी गुप्त रूप से करना चाहिए। प्रार्थना लोगों को नहीं बल्कि परमात्मा तक पहुंचनी चाहिए। क्योंकि ईश्वर ही सब जानते हैं।

4. उपवास – बाइबिल के अनुसार जब भी उपवास रखें तो साफ़ ह्रदय से रखना चाहिए और चेहरे पर उदासी नहीं होनी चाहिए। जिससे दूसरा कोई समझ न पाए कि आपने उपवास रखा है। पूरी श्रद्धा भाव से उपवास रखना चाहिए। उपवास रखने से पहले सर पर तेल और मुँह धो लेना चाहिए।

5. दूसरों पर दोष नहीं लगाना चाहिए – दूसरों पर दोष नहीं लगाना चाहिए बल्कि अपने दोषों को दूर करना चाहिए।

6. अशुद्ध बातें नहीं करनी चाहिए – लोगों में अशुद्धता खुद से ही पनपती है अर्थात लोगों को अपने मन में आयी अशुद्धियों को शुद्ध करना चाहिए। छल – कपट आदि नहीं होना चाहिए। इस तरह की अशुद्ध आदतें जो मनुष्य के ह्रदय को अशुद्ध करती हैं उन्हें तुरंत ही त्याग देना चाहिए।

7. ईश्वर में विश्वास – यीशु मसीह ने बताया है कि परमेश्वर पर विश्वास रखो। इस बात कि चिंता मत करो कि तुम क्या खाओगे, क्या पहनोगे, कहाँ रहोगे? ये सब परमेश्वर हमें प्रदान करते हैं। हमें बस ईश्वर वर विश्वास रखना चाहिए।

8. परमेश्वर की आज्ञा का पालन – ईश्वर की आज्ञा का पालन करना चाहिए व उन पर विश्वास रखना चाहिए। ऐसा करना ही परम धर्म है।

9. विश्वास रुपी मार्ग का पालन करो – परमेश्वर तक पहुँचने के लिए उस पर विश्वास रखो, मुझ पर विश्वास रखो, परमात्मा के पास तुम्हारे लिए बहुत स्थान है।

10. वैर करना वर्जित – यीशु मसीह ने कहा है कि ईश्वर ने मुझे भेजा है। जो लोग इस संसार के लोगों से वैर करेंगे तो वो मुझसे भी वैर करते हैं। संसार के किसी भी लोगों से वैर नहीं करना चाहिए। वैर करने से उस व्यक्ति को कभी भी शान्ति नहीं मिलेगी।

लोगों में सेवा भावना होनी चाहिए, दूसरों की उन्नति में ख़ुशी होना चाहिए, धैर्य रखने के भी गुण होने चाहिए।

ईसाई धर्म के कुछ प्रमुख त्योहार और दिन

ईसाई धर्म के कुछ पर्व और त्योहार हैं जो मानवता और मोक्ष प्राप्ति का सन्देश देते हैं –

1. क्रिश्मस डे – क्रिश्मस डे को बड़ा दिन के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व यीशु मसीह के जन्म दिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

2. गुड फ्राइडे – इसे पवित्र शुक्रवार भी कहते हैं। यह दिन यीशु मसीह के बलिदान का दिन है। इस दिन उन्होंने अपना जीवन लोगों को अर्पित कर दिया था, उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया था।

3. ईस्टर – क्रूस पर चढ़ाये जाने के तीसरे दिन बाद यीशु मसीह का पुनः जन्म हुआ था। इस दिन जब इनका पुनः जन्म हुआ तो लोगों ने खजूर की डालियाँ लेकर उनका स्वागत किया था, इसीलिए इसे “खजूर का इतवार” नाम से भी जाना जाता है।

धर्म ग्रन्थ : इस धर्म का पवित्र ग्रन्थ बाइबिल है। इसका पहला भाग यहूदियों का धर्म ग्रन्थ ही है व दूसरा भाग नया नियम है।

लोगों का कल्याण करने के लिए यीशु मसीह ने इस धरती पर जन्म लिया था। इस धर्म का उद्देश्य मानव, जीवों अर्थात सभी से प्रेम करना है। वास्तव में ये धर्म मानवता का सन्देश देता है।

 

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