★ विश्व को जीत लेने वाले सिकंदर का जीवन परिचय★

★ जीवन परिचय ★

सिकंदर महान का जन्म 20 जुलाई 356 ईसा-पूर्व को पेलामेसेडाॅन युनान में हुआ था। सिकंदर का पूरा नाम एलेक्ज़ेंडर तृतीय और एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन था। वह मेसेडोनिया का ग्रीक प्रशासक था। सिकंदर के पिता का नाम फिलीप द्वितीय और माता का नाम ओलंपियाज था।

सिकंदर के पिता का नाम फिलीप और माता का नाम ओलंपिया था। सिकंदर का विवाह रुखसाना के साथ हुआ था। इतिहास में सिकंदर सबसे कुशल और यशस्वी सेनापति माना गया। अपनी मृत्यु तक सिकन्दर उस तमाम भूमि को जीत चुका था जिसकी जानकारी प्राचीन ग्रीक लोगों को थी। इसलिए उसे विश्वविजेता भी कहा जाता है।

★ अलेक्ज़ेंडर और भारत का संबंध ★

भारत में सिकंदर का पुरू से युद्ध हुआ, जिसमें पुरू की हार हुई। भारत पर सिकंदर के आक्रमण के समय चाणक्य तक्षिला में अध्यापक थे। तक्षिला और गांधार के राजा आमीन ने सिकंदर से समझौता कर लिया। चाणक्य ने भारत की संस्कृति को बचाने के लिए सभी राजाओं से आग्रह किया किन्तु सिकंदर से लडने कोई नहीं आया। पूरू ने सिकंदर से युद्ध किया था किन्तु हार गया। मगध के राजा महापदमानन्द ने चाणक्य का साथ देने से मना कर दिया और चाणक्य का अपमान भी किया। चाणक्य ने चंद्रगुप्त को साथ लेकर एक नये साम्राज्य की स्थापना की और सिकन्दर द्वारा जीते गये राज्य पंजाब के राजदूत सेक्युकस को हराया। सिकंदर के आक्रमण के समय सिंधु नदी घाटी के नीचले भाग में विशिविगण के पडोस में रहने वाले एक गण का नाम अगल रसाई था, सिकंदर जब सिंधू नदी के मार्ग से भारत में वापस लौट रहा था तो इस घर के लोगो से उसका मुकाबला हुआ। अगल रसोई लोगों ने सिकंदर से जमकर लोहा लिया, उनके तीर से सिकंदर घायल भी हो गया।

★ अलेक्जांड्रिया नाम का एक नया राज्य बसाया ★

सिकंदर सिर्फ बीस वर्ष की आयु में मेसिडोनिया का राजा बना और विश्व को जीत लेने का सपना बुनने लगा। अपने पिता की एशिया माईनर को जीतने की इच्छा को पूरी करने के लिए अपने सैनिकों, हथियारों और लश्कर के साथ निकल पड़ा। इसके बाद लगातार सिकंदर को एक के बाद सफलता मिलने लगी और वह अपने उद्देश्य की ओर तेजी से बढ़ने लगा। कई छोटे बड़े राज्यों को जीतने के बाद वह मिस्र तक जा पहुंचा। जहां उसने अलेक्जांड्रिया नाम का एक नया राज्य बसाया। यहां उसने एक विश्वविद्यालय की स्थापना की साथ ही अन्य कई इमारतों का निर्माण करवाया।

★ ईसान की राजकुमारी रुखसाना से शादी ★

अपना राज्य बसाने के बाद भी सिकन्दर चैन से नहीं बैठा और मेसोपोटामिया होता हुआ ईरान जा पहुंचा। वहां के राजा डेरियस तृतीय को अरबेला के युद्ध में हरा कर सिकंदर ने ईसान की राजकुमारी रुखसाना से शादी कर ली और आगामी रणनीतियों को पूरा करने के लिए जी जान से कोशिश करने लगा।

★ 33 वर्ष की आयु में इस दुनिया को छोड़ा ★

कुछ समय बाद सिकन्दर ने भारत को जीतने का मन बनाया और भारत पर आक्रमण कर दिया। इस युद्ध् में उसने भारत का सीमांत प्रदेश जीत लिया। लेकिन भारतीय राजा पोरस ने उसे कड़ी टक्कर दी। जिसके बाद वह ईरान की ओर लौट गया। 323 ई.पू. में वह बेबीलोन पहुंचा और वहां वह एक बीमारी के दौरान 33 वर्ष की आयु में इस दुनिया को छोड़ कर चला गया।

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