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हैदराबाद का इतिहास, पर्यटन , बिरयानी और कुछ और रोचक तथ्ये

हैदराबाद का इतिहास, पर्यटन , बिरयानी और कुछ और रोचक तथ्ये

Posted on February 27, 2019April 8, 2024 By admin

हैदराबाद शहर दक्षिण भारत में स्थित है और यह तेलंगाना की राजधानी के साथ-साथ आंध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी भी है। 650 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को आच्छादित करते हुए, हैदराबाद की जनसंख्या 6 करोड़ 7 लाख है। यह शहर अपने समृद्ध इतिहास और मुँह में पानी लाने वाले व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। हैदराबाद शहर एक समय में मोती और हीरे का व्यापारिक केंद्र था। इसे आज भी मोतियों के शहर के रूप में जाना जाता है।

हैदराबाद शहर का इतिहास बहुत पुराना हैं यहाँ क़ुतुब शाही, मुग़लों एवं निजामों ने राज्य किया था. यहाँ अनेकों मस्जिद, चर्च, मंदिर और बाजार है. पर्यटन से संबंधित मेले शहर में नियमित रूप से आयोजित होते रहते है. पर्यटन की दृष्टि की हैदराबाद पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।इस खूबसूरत शहर के नामकरण की कहानी भी बड़ी रोचक है। कहा जाता है कि हैदराबाद की नींव बसाते समय यहाँ के नवाब को भागमती नाम की एक बंजारा लड़की से प्रेम हो गया था। भागमती से नवाब की शादी के बाद नवाब ने इस शहर का नाम ‘भाग्यनगर’ रखा। उस वक्त के तत्कालीन चलन के अनुरूप इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेने के बाद भागमती का नाम हैदरमहल रखा गया। हैदर महल के नाम पर ही इस शहर का नाम भी ‘हैदराबाद’ रखा गया। निजाम ब्रिटिश राज के समय एक राजसी राज्य बन गया, जिसकी राजधानी स्वयं हैदराबाद थी. हैदराबाद राज्य, राजधानी के तौर पर 150 वर्षो तक रहा, आजादी के बाद 1948 में इसे भारतीय संघ में लाया गया और आंध्रप्रदेश की राजधानी बनाया गया. 2014 में आंध्रप्रदेश से तेलांगना प्रदेश अलग हो गया, जिसके बाद हैदराबाद दोनों राज्यों की राजधानी बन गई

पर्यटन:-

हैदराबाद मे घूमने फिरने की जगह की कोई कमी नही है।शहर के सुंदर स्मारकों से लेकर स्वादिष्ट बिरयानी और पारंपरिक व्यंजन के आनंद के अलावा हैदराबाद में पर्यटकों के लिए बहुत कुछ है। खरीददारी का शौक रखने वालों के लिए अनोखे पुराने बाजार के साथ-साथ यहां कई मॉल भी हैं। इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोग पूरे शहर में फैले शानदार मकबरे, महल, किलों और मस्जिदों के भव्य वास्तुशिल्प को देख सकते हैं।


चारमीनारयह प्रभावशाली प्रवेशद्वार पुराने हैदराबाद के बीचो-बीच स्थित है, और अब यह शहर का सबसे प्रचलित प्रतीक बन चुका है। इसका निर्माण सन 1591 में मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने शहर में प्लेग खत्म होने की खुशी में करवाया था। इसका नाम इसके चार खूबसूरत मीनार के कारण पड़ा है। इसकी छत तक ऊंचाई 20 मीटर है। इसे चार मेहराब से सपोर्ट मिला है जो नीचे बने हैं। दूसरी मंजिल पर एक मस्जिद है जो शहर की सबसे पुरानी मस्जिद है आसपास के इलाके को अच्छी तरह जानने के लिए हर रविवार सुबह आन्ध्र प्रदेश टूरिज्म द्वारा आयोजित की जाने वाली गाइडिड हेरिटेज वॉक का हिस्सा बनें।

गोलकोंडा फोर्ट:शानदार पहाड़ियों पर बना यह किला शहर के केंद्र से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मूल रूप से इसका निर्माण काकातियों ने मिट्टी के किले के रुप में किया था, यह कुतुब शाही वंश के दौरान 16 वीं और 17 वीं शताब्दी में यह एक प्रभावशाली किले में परिवर्तित हो गया था। 17 वीं शताब्दी में मुगलों की सेना और कुतुब शाही के बीच एक लंबी लड़ाई का स्थान था, जिसका मुगलों की विजय के साथ समापन हुआ।

जब आप यहां आएं तो इसकी शानदार ध्वानि प्रणाली को जरूर देखें क्योंकि किले के प्रवेश पर की गई आवाज पूरे किले में सुनाई देती है। गोलकुंडा का इतिहास वास्तव में ध्वनि और प्रकाश के शो के दौरान जीवित हो उठता है जो हर शाम अंग्रेजी, हिंदी और तेलगू में आयोजित किया जाता है। कुतुब शाही शासकों की गरिमापूर्ण कब्रें गोलकोंडा किले के निकट एक अलग परिसर में सुंदर बगीचों के बीच स्थित है।

रामोजी फिल्म सिटी: हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित यह विशाल फिल्म स्टूडियो कॉम्प्लेक्स आंध्र प्रदेश का फिल्मों के साथ प्रेम का प्रमाण है। सिनेमा के इस डिज़्नीलैंड में 500 से ज्यादा अलग-अलग सेट हैं, जिनका उपयोग हिंदी, तेलगू और अन्य क्षेत्रीय फिल्मों के लिए किया जाता है। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे बड़े फिल्म कॉम्प्लेक्स के रूप में प्रमाणित किया जा चुका है।

पर्यटक विभिन्न थीम-आधारित और उम्र के अनुसार टूर का चयन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, रामोजी मूवी मैजिक टूर पर्यटकों को एक्शन स्टूडियो से, मिनी ट्रेन के जरिए सिनेमा से प्रेरित यात्रा पर ले जाएगा। जिसका अंत मनोरंजन पार्क के साथ होता है। यहां कई थीम रेस्तरां और शॉपिंग आउटलेट आपके अनुभव को पूरा करते हैं। इस थीम पार्क में, पसंदीदा रोमांटिक गानों और दृश्यों का अपने प्रेमी के साथ आनंद ले सकते हैं।

सुधाकार्स म्यूजियम: इस अनोखे संग्रहालय में अच्छी खासी कारों को अलग-अलग रुपों में प्रदर्शित किया गया है। यह संग्रहालय, के सुधाकर के दिमाग की उपज है जिनके नाम सबसे बड़ी ट्राईसाइकिल बनाने का गिनीज बुक रिकॉर्ड दर्ज है। उनकी हास्यपूर्ण कल्पना को आप इनके कार की अलग-अलग आकृतियों में देख सकते हैं यहां कारों को बर्गर, ऊंची एडी के जूते, बैग, कैमरा और कंप्यूटर के आकार में तब्दील किया गया है। इन सभी वाहनों को सुधाकर ने कबाड़ से बनाया है जिन्हे बेहद कम गति में चलाया भी जा सकता है।

स्नो वर्ल्ड: इसे देश का पहला थीम पार्क माना जाता है, पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए बहुत सारे विकल्प हैं। यहां बर्फ में खेलने की जगह, मेरी गो राउंड, मूर्तियां और स्नो फॉल सेशन है। रेनफॉरेस्ट (वर्षावन) और हॉरर-थीम पार्क, परिसर में रेसिंग कोर्स और गेम आर्केड भी हैं।

भाषा:-वास्तव में हैदराबाद में एक भाषा-भाषी लोग नहीं है। यहाँ के मुसलमानों की भाषा उर्दू है, कायस्थ और खत्रियों की हिन्दी है, मरेठों की भाषा मराठी है, राजस्थानी लोग भोजपुरी और मारवाड़ी बोली बोलते है, तेलंगे तेलुगु भाषा बोलते है पर यह तेलुगु आन्ध्र प्रदेश की तेलुगु से अलग है। आन्ध्र प्रदेश की तेलुगु साहित्यिक है जबकि इन तेलंगाना वासी तेलंगों की तेलुगु एक बोली की तरह है। जनजाती पारदनों और लम्बाड़ियों की अपनी-अपनी बोलियाँ है पर सबकी आम भाषा हैदराबादी उर्दू है।


कुछ हैदराबादी शब्द बहुत अधिक जाने-पहचाने हो गए है जैसे हाँ के लिए हौ कहना और यह हौ में भी ह के साथ औ की मात्रा का सामान्य उच्चारण नहीं है, सही उच्चारण है – hauo और नहीं के लिए नक्को कहना, वास्तव में नक्को मराठी का शब्द है और पता नहीं यह कैसे हैदराबादी उर्दू में आ गया है, यह शब्द मरेठों के हैदराबाद रियासत में बसने के पहले से है।


हैदराबादी उर्दू को दक्खिनी उर्दू कहा जाता है क्योंकि यह लखनऊ की उर्दू से अलग है। लखनऊ की उर्दू साहित्यिक है जबकि हैदराबाद की उर्दू वास्तव में भाषा से अधिक एक बोली की तरह है।

यहाँ कुछ ऐसे शब्द है जिनका दैनिक उपयोग होता है –
हाँ – हौ
नहीं – नक्को (मना करने के लिए)
नहीं – नइ
नहीं नहीं – नक्कोइच्च नक्को
क्यों – कईकू
यहीं है – यईच्च है
वहीं है – वईच्च है
इधर ही – इदरिच्च
उधर ही – उदरिच्च
पड़ता है -पड़तईच्च
ऐसा – अईसा
ऐसा ही – अइसइच्च
वैसा – वईसा
वैसा ही – वइसइच्च
कैसा – कईसा
कैसा ही है – कइसाकीच्च
वो – उनो
ये – इनो
मुझे – मेरेकू
तुझे – तेरेकू
अपने को – अपनकू
तुम लोग – तुमे लोगा
बातें – बातां
बहुत – भोत
कच्चा है – कच्चइच है
पका ही नहीं – पकईच्च नइ


खान पान

हैदराबाद के खाने की बात शुरु होते ही मुंह से पानी आने लगता है। लाजवाब बिरयानी से लेकर हैदराबाद की ईरानी चाय सब इतनी मशहूर हैं जो आप हैदराबाद जाकर उसे खाने से बच ही नहीं पाते। हैदराबाद में ऐसी कई बाज़ार हैं जिसके सामने से जब आप गुगरते हैं तो वहां के खाने की खूशबू खुद ब खुद आपको उस जगह ले जाती है जहां आपको शानदार खाना मिलता है।

हैदराबाद के खाने की बात शुरु होते ही मुंह से पानी आने लगता है। लाजवाब बिरयानी से लेकर हैदराबाद की ईरानी चाय सब इतनी मशहूर हैं जो आप हैदराबाद जाकर उसे खाने से बच ही नहीं पाते। हैदराबाद में ऐसी कई बाज़ार हैं जिसके सामने से जब आप गुगरते हैं तो वहां के खाने की खूशबू खुद ब खुद आपको उस जगह ले जाती है जहां आपको शानदार खाना मिलता है।

हैदराबादी बिरयानी के बारे में तो सब जानते हैं लेकिन इसके अलावा बोटी कबाब, लुखमी, कीमा समोसा, फिरनी, खुमानी का मीठा, ईरानी चाय और हैदराबादी बिस्कुट भी बेहद फेमस है। सिर्फ हैदराबाद में ही नहीं बल्कि इस खाने को पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है। लेकिन आपके ये स्वाद और सुगंध से भरा खाना हैदराबाद में कहां मिलेगा और इसकी क्या खासियत है अब आप ये भी सब जान लीजिए।

हैदराबाद की मशहूर बिरयानी: हैदराबाद की मशहूर बिरयानी की तारीफें तो आपने खूब सुनी होंगी लेकिन क्या यहा की बिरयानी में क्या खास है ये भी जान लें। हैदराबाद में बिरयानी भी स्ट्रीट फूड की तरह ही पॉपुलर है। इसकी खुशबू आपको दूर से ही आने लगती है। यहां आपको चिकन बिरयानी से लेकर मटन बिरयानी, वेज बिरयानी और कई और तरह की बिरयानी मिलेगी। सबसे खास बात तो ये है कि हर बिरयानी का स्वाद तो अलग है ही लेकिन उसकी खूशबू भी अलग ही होती है


हैदराबादी कीमा समोसा:- कीमा समोसा तो हैदराबादी शान वाला स्नैक्स है। यहां के लोग आलू वाले समोसे की जगह कीमा समोसा खाना ही पसंद करते हैं। खासकर मानसून में मौसम में कीमा समोसा की डिमांड और भी ज्यादा बढ़ जाती है। हैदराबाद के हर नुक्कड़ पर आपका मसालेदार कीमा समोसा कई तरह की चटनी के साथ खाने के लिए मिल जाएगा। इसे लोग सुबह नाश्ते में या शाम को चाय के साथ खाना ज्यादा पसंद करते हैं।

हैदराबाद के बोटी कबाब: बोटी कबाब जो लोग नॉन वेजिटेरियन खाना पसंद करते हैं उनके मुंह में तो इसका नाम सुनते ही पानी आ जाता है। बोटी कबाब भी स्टार्टर स्नैक्स की तरह की डिनर से पहले ऑर्डर किया जाता है। वैसे बोटी कबाब खाने के बाद अच्छे अच्छे लोगों का मूड बदल जाता है।

हैदराबादी लुखमी:- हैदराबाद के स्ट्रीट फूड में लुखमी काफी फेमस है। ये मैदे से बनता है जिसमें कीमा भरा होता है। लुखमी का स्वाद लाजवाब है। आप इसे तीखी चटनी में डुबोकर खाएंगी तो इसका स्वाद कभी भी भूल नही पाएंगी। निजाम के इस शहर में अगर आप अगली बार जाए और स्ट्रीट फूड खाने का मन हो तो आप लुखमी का स्वाद जरुर चखें।

हैदराबादी खुबानी का मीठा:- खुबानी का मीठा हैदराबाद की सबसे फेमस स्वीट है। अगर आप कभी हैदराबाद जाती हैं तो आपको इस शानदार हैदराबादी मिठाई का स्वाद लेने की कोशिश जरूर करनी चाहिए। इसे सूखे खुबानी से बनाया जाता है। खुबानी के मीठे को आइस्क्रीम या फिर मलाई के साथ सर्व किया जाता है। आपने अगर एक बार इसे खा लिया तो आप इसे बार-बार खाना चाहेंगी।

History, Tourist Place

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