आम के बारे में रोचक तथ्ये | जाने आम के प्रकार

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आम को फलों का राजा कहा जाता है। आम दुनियां में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल है। आम आज से करीब 5000 साल पहले भारत में ही सबसे पहले उगाया गया था। आम का पेड़ 100 फिट तक बड़ा हो सकता है। आम की छाल और पत्ते सदियों से दवाइयाँ बनाने में प्रयोग किये जाते हैं। गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा पसंद किया जानेवाला फल है आम। इसे आम और खास, सभी लोग बड़े शौक से खाते हैं।भारत का राष्ट्रीय फल आम है। यह हमारी सेहत को दुरुस्त बनाए रखने में मददगार है। अगर आप बहुत ज्यादा और बेवक्त आम खाते हैं तो इससे आपकी सेहत को नुकसान भी पहुंच सकता है। शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा मिलेगा जिसे आम का फल पसंद ना हो। आम स्वाद में ही नहीं सेहत के मामले में भी लाजवाब है। माना जाता है कि पूरी दुनिया में आमों की 1500 से ज्यादा किस्में हैं, जिनमें 1000 किस्में भारत में उगाई जाती हैं। हर किस्म की अपनी ही अलग पहचान, महक और स्वाद होता है । आम खाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है इसमें विटामिन A, विटामिन C, और फाइबर होता है।आप को तेजी से पकाने के लिए उन्हें कागज में लपेट कर गर्म जगह रखा जाता है।

भारत में आम से भरी टोकरी किसी को देना मित्रता का सूचक माना जाता है।महात्मा बुद्ध ने आम के वृक्ष के नीचे बैठ कर ही तप किया और ज्ञान प्राप्त किया था। आम काजू और पिस्ता की प्रजातियों से ही सम्बंधित है। एक कप मैंगो शेक में 100 कैलोरी होती है।

आम के विषय मे रोचक तथ्य Aam Se Jude Rochak Tathye 

  • आम के पत्ते भी हमारे सेहत के लिए बहुत अच्छे साबित हुए हैं। डाइबिटीज़, ब्लड प्रेशर, और किडनी स्टोन जैसे बीमारी का इलाज इससे हो सकता है।
  • आम के पत्तों को या उनके लक्ड़ियों को जलाना हमारे वातावरण के लिए हानीकारक होता है, और इसका बुरा असर हमारे आँख़ों और फेफड़ों पर पड़ सकता है।
  • त्योहार के समय में आम के पत्तों को घर सजाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  • ये फल, भारत का राष्ट्रीय फल है।
  • आम हमारे हड्डियों को मज़बूत बनाता है, और हमारा वज़न भी घटाता है।
  • आम का पापड़ भी बनता है। स्वाद में मीठा, ये भी बहुत सारे लोगों को बहुत पसंद है।
  • आम से जुड़ी कई सारे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कहानियाँ जुड़ी हूईं हैं, जो आज भी बच्चों में प्रचलित की जातीं हैं।
  • आम का हम रस भी बनाकर पी सकते हैं। इसके अलावा, कई घरों में इसका अचार भी बनता है।
  • आम पर आधरित एक हिंदी फिल्म भी बहुत जल्दी बनने वाली है।
  • आम के बीज को साबुन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  • आम को उसका नाम एक संस्कृत शब्द से मिला है – आम्र फलम। हिंदी में इसका अर्थ होता है – आम फल।
  • आज भारत के ही अन्य शहरों में, आम को अलग-अलग नाम से जाना जाता है।
  • भारत में आम की फसल सबसे ज़्यादा होती है। इसलिए हमारे देश को आम का राजधानी कहा जाता है।
  • आम का छिलका बहुत सी बीमारियों का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जात है। उनमें से पाइल्स, कॉन्स्टिपेशन, और अर्थराइटिस कुछ हैं।

“AAM KITNE PARKAR KE HOTE HAI आम के प्रकार”

उनमें भी कुछ बेहद प्रचलित किस्म हैं, जिन्हें बड़े शौक से खाया जाता है…

अल्फांसो: इस आम को आमों का राजा भी कहा जाता है। इसे मुख्य रूप से महाराष्ट्र में उगाया जाता है। अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। बादामी, गुडू, और कगड़ी हापुस आदि इसी के नाम हैं। यह मीडियम साइज का तिरछापन लिए अंडाकार और संतरी पीला रंग का होता है। इसका गूदा मुलायम और रेशारहित होता है। यह अप्रैल से जून के बीच आता है। मार्केट रेट 150 से 200 रुपये किलो है।

सिंदूरी: यह आम आंध्रप्रदेश की पैदावार है। यह मध्यम आकार का अंडाकार आम है। इस आम का ऊपरी हिस्सा लाल और बाकी हरा रंग का होता है। इसे अप्रैल-मई के महीने में खरीदा जा सकता है। मार्केट रेट 100 से 120 रुपये किलो है।

सफेदा: यह खासतौर से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का है। इसे बैंगनपल्ली और बेनिशान नाम से भी जाना जाता है। यह आकार में बड़ा और थोड़ा मोटा होता है। इसका रंग सुनहरा पीला होता है। यह अप्रैल और मई के महीने में आता है। इसे आमतौर से मैंगो शेक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मार्केट रेट 75 से 80 रुपये किलो होता है।

तोतापरी: यह मुख्य रूप से आंध्रप्रदेश का है। बाजार में यह मई में आता है। यह आकार में थोड़ा लंबा होता है। इसकी तोते की चोंच जैसी नोक निकली होती है। यह स्वाद में थोड़ा खट्टा होता है। माज़ा, स्लाइस, फ्रूटी आदि ड्रिंक्स बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। मार्केट रेट 55 रुपये किलो है।

केसर: यह गुजरात की प्रमुख किस्म है। मई के अंत में बाजारों में आसानी से यह उपलब्ध होती है। इसमें गूदा अधिक होता है और इसकी गुठली पतली होती है। खाने में बहुत मीठा और रसदार होता है। मार्केट रेट 50 से 60 रुपये किलो है।

दशहरी: यह यूपी का सबसे मशहूर आम है। यह साइज में मीडियम, लेकिन कुछ लंबा होता है। बिना कार्बाइड या मसाले से पके दशहरी आम का रंग हरा होता है। कैल्शियम कार्बाइड या अन्य किसी रसायन से पके दशहरी आम का रंग हरा और पीला मिक्स होता है। आम की यह किस्म देशभर में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली किस्म है। यह जून-जुलाई महीने में उपलब्ध होता है। यह खाने में मीठा और स्वाद से भरपूर होता है। मार्केट रेट 70 रुपये किलो है।

लंगड़ा: यह किस्म यूपी-बिहार में खूब पॉपुलर है। मध्य जून से जुलाई मध्य तक यह आता है। यह मीडियम अंडाकार साइज का होता है। इसका रंग हरा होता है और इसमें रेशे कम होते हैं। इसे ज्यादा दिन तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता है। इसका मार्केट रेट 70 रुपये किलो है।

चौसा: यह यूपी की फसल है। मुख्य रूप से जुलाई से अगस्त महीने में आता है। साइज में मीडियम अंडाकार और थोड़ा पतला होता है। इसका रंग पीला होता है। यह बेहद रसदार और मीठा होता है। मार्केट रेट 100 रुपये किलो है।

डिंगा: यह लखनऊ की प्रसिद्ध उपज है। यह आकार में थोड़ा छोटा अंडाकार और गोल्डन सुनहरे रंग का होता है। इस आम को आमतौर पर चूसकर खाया जाता है। जुलाई से अगस्त के बीच यह आता है। खाने में स्वादिष्ट मीठा और रेशेदार होता है। मार्केट रेट 50 रुपये किलो है।

फजली: यह आम सीजन का सबसे अंतिम आम होता है। लोग अगस्त तक इसका स्वाद लेते हैं। आम का सीजन जब खत्म हो जाता है तब यह आता है। मार्केट रेट 80 से 90 रुपये किलो है।

“आम खरीदते हुए ध्यान रखें”

बाजार में जब हम आम खरीदने जाते हैं तो अक्सर हमारे मन में सवाल उठता है कि आम मीठा होगा कि नहीं, सही तरह से पका है भी कि नहीं। सवाल यह भी रहता है कि आम को पकाने के जो अलग-अलग तरीके बाजार में उपलब्ध हैं उनकी पहचान आप किस तरह से कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि सही तरीके से पके आम की पहचान कैसे की जाए:

देखें कि आम के ऊपर अम्लीय रस के दाग-धब्बे न हो।

आम पर किसी रसायन के अलग-अलग सफेद या नीले निशान न हों।

कई बार आम को इस तरह के केमिकल्स से पकाया जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। अगर आम पर समान रूप से सफेद पाउडर होगा तो वह प्राकृतिक तरीके से पका होगा। हालांकि इसे बहुत बारीकी से चेक करना पड़ेगा, लेकिन आप ऐसा करें क्योंकि हेल्थ के लिए यह बहुत जरूरी है।

अमूमन आम को छूकर भी उसके पकने का अंदाजा लगाया जा सकता है। पका हुआ आम थोड़ा सॉफ्ट होता है। अधपका आम कहीं से सॉफ्ट और कहीं से ठोस होगा। जबकि कच्चा आम पूरा ही ठोस होगा।

एक दूसरा तरीका यह है कि आप आम को बिल्कुल नीचे से अंगूठे से हल्का दबाकर देखें। पका हुआ आम छूने में सॉफ्ट लगेगा। इसके लिए आपको पूरे आम को दबाकर देखने की जरूरत नहीं है।

राइपनिंग मेथड से पके आमों का रंग एक समान होगा क्योंकि यह एक समान तापमान में पकाए जाते हैं और यह खाने में काफी स्वादिष्ट और दिखने में बेहद खूबसूरत रंग के होते हैं।

पहचानें खतरनाक आम

  • आम तो कैल्शियम कार्बाइड से पकाया गया है, इसका पता लगाना आसान नहीं है। फिर भी हम कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं:
  • आम की ज्यादातर किस्मों के नेचरली पकने का सीजन मई-जून ही होता है। इसलिए इससे पहले बिल्कुल पीले आम कार्बाइड से पके ही हो सकते हैं। अप्रैल महीने में मिलने वाला आम अधिकतर इसी तरह से पकाया जाता है। हो सके तो अप्रैल से पहले आम खाने से परहेज करें।
  • हर किस्म का आम अपनी खुशबू लिए होता है,

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