★ अंगदान या देहदान ,महादान ज़रूर करें

दोस्तों! आप सभी जानते है की हमारा शरीर कुल पाँच तत्त्वों से मिलकर बना हुआ है। “मिट्टी,हवा, आग,गगन,जल” जी हाँ दोस्तो! कहा भी जाता है कि ” क्षितिज, जल ,पावक, गगन ,समीरा पंच तत्व से यह बना शरीरा”।

दोस्तों! हम अपनी लाइफ मे बहुत से सारे अच्छे काम करते है, और हर तरह का दान भी देते है। हम किसी को वस्त्र दान करते है, किसी को अनाज दान करते है, किसी को गौ दान करते है ऐसे हर व्यक्ति अपनी शक्ति के अनुसार कुछ न कुछ दान ज़रूर करता है। हम आज बात करेंगे एक ऐसे दान की जो हर व्यक्ति अगर चाहें तो कर सकता है और अगर वो ये दान करता है तो दोस्तों! यकीं मानिए दुनिया मे इससे बड़ा दान कोई नही हो सकता है। इस दान मे अन्य दान की गई वस्तुओं से ज्यादा पुण्य मिलता है। दोस्तों! हम बात कर रहे है “अंगदान ” की। अंगदान महादान होता है। अंगदान यदि आप चाहते हैं कि मरने के बाद आपके अंग किसी के काम आएं तो आप अंगदान कर सकते हैं। लेकिन सच तो यह है कि आज भी बहुत कम लोग देह दान करते हैं। दोस्तों! लेकिन भारत मे बहुत से लोग आज भी अंगदान हो या देहदान बहुत कम लोग ही कर पाते है।

आज हम अपने इस आर्टिकल के बारे मे बताएंगे कि यदि कोई इस महादान अर्थात देहदान या अंगदान करना चाहे तो वो किस प्रोसेस के ज़रिये इस को कर सकता है।

★ क्या होता है देहदान या अंगदान :—–

देहदान एक प्रोसेस है जो किसी इंसान के मरने के बाद उसकी इच्छानुसार उसके परिजन किसी राजकीय अस्पताल एवं मेडिकल रिसर्च सेंटर को उसकी डेडबॉडी दे देते है। वे सेंटर उनकी डेड बॉडी पे मेडिकली रिसर्च करके मेडिकल के क्षेत्र मे आगे बढ़ते है।

★ क्या लाभ है देहदान या अंगदान का :—-

दान मे मिली बॉडी को डॉक्टर उसे रिसर्च के लिए रख लेते है और जो नए नए स्टूडेंट्स डॉक्टरी के पढ़ाई के लिए आते है उन्हें ट्रेनिंग देने मे उसका यूज़ करते है। उनकी डेड बॉडी के हेल्प से मानव शरीर की कार्यप्रणाली के बारे मे छात्रों को बताया जाता है।
बॉडी का प्रयोग वैज्ञानिक रिसर्च के लिए भी किया जाता है।

★ ‌‌‌देहदान कौन कर सकता है :–

वैसे तो देहदान कोई भी कर सकता है । देहदान करने के लिए कोई भी किसी भी प्रकार का धर्म या जाति और लिंग व आर्थिक आधार का कोई बंधन नही है। कम आयु के बच्चे भी देह दान कर सकते हैं। लेकिन इसमे कुछ मेडिकल कंडिशन भी शामिल होती हैं।
लेकिन एक सामान्य तौर पे कोई भी स्वस्थ व्यक्ति बड़ी स्वेच्छा से देहदान या अंगदान कर सकता है, लेकिन इन बीमारियों से जुड़े व्यक्ति भी देहदान कर सकते है। जैसे :– कैंसर, हृदय रोग, ल्यूपस, एएलएस, गठिया, स्ट्रोक और मधुमेह जैसे रोगी भी अपने शरीर को  दान कर सकते हैं।

★ दान की बॉडी के अंग दूसरे को यूज़ हो सकते है :——

दोस्तों! इस बात की कोई गारेंटी नही है कि उस व्यक्ति के बॉडी के पार्ट किसी दूसरे ज़रूरतमंद व्यक्ति के बॉडी मे यूज़ किये जा सकते है। उस डेड बॉडी का यूज़ बस केवल स्टडी के लिए ही किया जा सकता है।

★ किसी को अगर देहदान करना हो तो क्या करें :—–

दोस्तों! देहदान की एक निश्चित प्रक्रिया होती है। आप किसी भी अस्पताल मे जाकर देहदान नही कर सकते है। कुछ ऐसे बड़े अस्पताल या मेडिकल कॉलेज होते हैं। जिनके अंदर दान की गई देह का प्रयोग अनुसंधान के अंदर किया जाता है। यह अस्पताल राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किया गया है। ‌‌‌हर राज्य के अंदर यह अलग अलग होते हैं।
अगर आपको ये पता है कि किस जिले मे देहदान या अंगदान की प्रक्रिया हो रही है तो उसके बाद आपको आगे का प्रोसेस करना होगा। आप उस अस्पताल मे कॉल करके पूछ सकते है और वहाँ के नियम जान सकते है।

★ ‌‌‌क्या डेड बॉडी का यूज़ करके उसका अंतिम संस्कार किया जा सकता है :—–

वैसे तो बॉडी का मेडिकली रिसर्च करने के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। अगर किसी अस्पताल को कंकाल की ज़रूरत होती है तो उसका अंतिम संस्कार नही किया जाता है। लेकिन जिस बॉडी का अंतिम संस्कार हो जाता है उसकी राख को परिजनों को नही दिया जाता है।

★ मरने के बाद अस्पताल को कैसे सूचित करें :—–

नियमतः उस व्यक्ति की मौत के 6 घंटों के भीतर शरीर को अस्पताल पहुंचाया जाना होता है। कुछ अस्पताल बॉडी को लेने के लिए अपने निजी वाहन भेजते है शर्त ये है कि आप का घर 100 किलोमीटर के अंदर होना चाहिए। अगर आपने पहले से पंजीकरण नही करवाया है तो पंजीकरण के बाद ही बॉडी को अस्पताल लेता है। यदि आप देह को 48 घंटे तक रखना चाहते हैं तो आप अस्पताल की मोर्चरी सुविधा का यूज कर सकते हैं।

★ ‌‌‌देहदान के लिए कौन कौन से डॉक्यूमेंट ज़रूरी है :——-

सबसे पहले आपको अपनी बॉडी का अस्पताल मे पंजीकरण करवाना ज़रूरी है,क्योंकि उससे डेथ के बाद डॉक्टर को मृत्यु प्रमाण पत्र और डोनर का आईडी कार्ड ज़ारी करने मे सुविधा होगी।

★ किस केस मे आपकी बॉडी को अस्पताल नही लेगा :—-‌‌‌

यदि किसी की मौत प्राकृतिक रूप से नही हुई है , या 3 दिन से अधिक किसी की मौत हुए हो चुकी है या किसी को कोई संक्रामक रोग हुआ हो तो अस्पताल उस बॉडी को नही लेगा ।

★ ‌‌‌देहदान पंजीकरण कैसे करें :—

वैसे तो बिना पंजीकरण के भी देहदान कर सकता है, लेकिन ये एक कानूनी प्रोसेस होता है जिससे उस बॉडी का कोई मिसयूज़ न कर पाए।
दोस्तों! हम बता रहे है कि क्या क्या स्टेप्स है देहदान करने के:—-

● जिस अस्पताल मे देहदान होता है वहाँ से आप पंजीकरण का आवेदन लेकर भर सकते है।

● इस एप्लीकेशन फॉर्म पे दो फ़ोटो, दो गवाहों के सिग्नेचर, होने ,ज़रूरी है। ध्यान दे कि एक ऐसे आदमी का सिग्नेचर हो जो आपका रिश्तेदार हो। उसके बाद नीचे दिए गए डाक्यूमेंट्स को नत्थी करके अस्पताल को देदे :—

● acknowledgement letter
● सम्मान प्रमाण पत्र
● डोनर आईडी कार्ड जिस पर पंजिकरण संख्या होगी
● कांटेक्ट नंबर जिससे आप अस्पताल से या अस्पताल आपसे सम्पर्क कर सकें।

★ ‌‌‌पंजीकरण के बाद दी मिलने वाली सुविधा :—

जिस व्यक्ति ने अपना देहदान के लिये पंजीकरण करा लिया है उनको अस्पताल की तरफ से मुफ़्त डॉक्टरी सुविधा और सामान्य और चिकित्सा जांच इसमे प्रमुख होती है। इसके अलावा मरने के बाद फ्री मे ही बॉडी को अस्पताल ले जाने की सुविधा। पंजीकरण के बाद आप ध्यान दे कि आप अपने परिवार को इसके बारे मे ज़रूर बता दे ।

★ ‌‌‌निधन के बाद की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार से होगी :—–

● डॉक्टर से मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करें :—-

व्यक्ति के निधन के बाद आपको सबसे पहले एक डॉक्टर से मृत्यु प्रमाण पत्र  प्राप्त करने की आवश्यकता होगी । क्योंकि आपको देह को 6 घंटे के अंदर अंदर उस अस्पताल पहुंचाना होगा । जिसमे देह को दान करना है।‌‌‌ यदि व्यक्ति की मौत अस्पताल के अंदर हुई है तो फिर डॉक्टर वहीं डेथ सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं। लेकिन यदि मौत घर मे हुई है तो फिर आपको किसी डॉक्टर को बुलाकर यह बनाना होगा । इस मे प्रमाण पत्र में डॉक्टर दस्तावेजों का विवरण जैसे कि व्यक्ति का नाम और अनुमानित आयु, पता और अन्य पहचान का विवरण, मृत्यु की तारीख और समय, और संभावित कारण ‌‌‌दिये होते हैं।

मृत्यु प्रमाण पत्र काफी महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जिसकी आवश्यकता आपको कई जंगहों पर पड़ेगी । जैसे दाहसंस्कार करना या देह दान मे भी। इस वजह से मृत्यु प्रमाण पत्र के मूल की कई प्रतियां अपने पास रखनी चाहिए।

‌‌ नोट :— आप नगरपालिका के द्वारा जारी किये गए  मृत्यु प्रमाण पत्र  का यूज नहीं कर सकते हैं। क्योंकि इसका प्रयोग केवल विरासत का दावा करने के लिए किया जाता है। अप्राकृतिक मौत की स्थिति के अंदर शव का परीक्षण किया जाता है। और ऐसी स्थिति के अंदर उस शव को उस अस्पताल के अंदर नहीं ‌‌‌दिखाया जा सकता है।

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