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तुलसी की खेती करें :- तेल या बीज बेचे दोनों मे मुनाफ़ा :—

तुलसी की खेती करें :- तेल या बीज बेचे दोनों मे मुनाफ़ा :—

Posted on December 25, 2019April 8, 2024 By admin

बहुत से लोगों का सपना होता है कि एक अपना व्यापार हो छोटा सा पर उनका ये सपना सपना ही रह जाता है जब उनको पूँजी की वजह से अपना सपना अधूरा ही छोड़ना पड़ता है। आजकल के समय मे अब ऐसा नही है अगर आप ख़ुद का व्यापार स्टार्ट करना चाहते है तो आप भी कम पूँजी का निवेश करके व्यापार को स्टार्ट कर सकते है। अगर आप का व्यापार का आईडिया सही है तो कम निवेश मे आप लाखों भी कमा सकते है।

आजकल लोग अँग्रेजी दवाओं से दूर होते जा रहे है और अपने इलाज़ के लिए आयुर्वेदिक और नैचुरल दवाईयों की मांग करते है। दिनोंदिन ये माँग बढ़ती जा रही है और ये बाज़ार अब एक बड़ा रूप लेता जा रहा है। ऐसे अगर हम कोई व्यापार करने की सोच ही रहे है तो क्यों न मेडिसिनल प्लांट की खेती का बिजनेस शुरू करें।

यह आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको बहुत अधिक पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. साथ ही इसके लिए आपको लंबी-चौड़ी खेती की जरूरत है. आप कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए भी इस बिजनेस को शुरू कर सकते हैं. मेडिसिन प्लांट के लिये आपको ज्यादा खेती की ज़रूरत नही होती जैसे :- तुलसी, आर्टीमीसिया एन्‍नुआ, मुलैठी, एलोवेरा आदि कम समय में तैयार हो जाते हैं.

इनमें से कुछ पौधें आप अपने घर और गमलों मे भी लगा सकते है । कम समय मे ये तैयार भी होते है और इनकी माँग भी बहुत ज्यादा है। जैसे अगर आप तुलसी के पौधें की खेती करते है तो आजकल मार्किट मे इसकी माँग ज्यादा है क्योंकि तुलसी कैंसर जौसे रोगों मे बहुत ही लाभदयक है। भारत में हिन्दू रीति रिवाजो के अनुसार तुलसी एक पूजनीय पौधा है, जिसे हिन्दू धर्म का पालन करने वाले प्रत्येक लोग अपने घर में लगाते है और इसकी पूजा करते है.

★ कौन सा मेडिसिन प्लांट लगाएं :—-

आपको तुलसी का पौधें का व्यापार करना ज़्यादा फायेदेमंद रहेगा क्योंकि ये एक मेडिसिन प्लांट तो है ही धार्मिक रूप से भी इसका बहुत महत्व है । इसकी पत्तियां दवाई का काम तो करती ही है साथ ही साथ हमारे वातावरण को भी शुद्ध रखती है। इसमें एक गुण यह भी है, कि यह पौधा रात में भी प्राणवायु ऑक्सीज़न ही उत्सर्जित करता है. इन सबके अलावा तुलसी एक औषधीय पौधा भी है, जिसकी पत्ति, तना, जड़ सभी भाग बहुत उपयोगी होते है. इसलिए आजकल लोग इसे व्यापारिक तौर पर उगाकर और उन्हे बाजार में बेचकर लाखो कि कमाई कर रहे है.

★ कैसे करें तुलसी का व्यापार :—-

1 हेक्‍टेयर में तुलसी की लागत काफी कम आती है. आपको इसकी खेती के लिए महज शुरुआती 15,000 रुपये खर्च करने की जरूरत है. बुआई के 3 महीने बाद ही तुलसी की फसल औसतन 3 लाख रुपये में बिक जाती है. मार्केट में मौजूद कई आयुर्वेदिक कंपनियां जैसे डाबर, वैद्यनाथ, पतंजलि आदि तुलसी की कॉन्ट्रैक्ट पर खेती कराती हैं.

★ तुलसी की खेती में निवेश और लाभ :—

एक हेक्टेयर में तुलसी की खेती करने के लिए आपको लगभग 15 से 20 हजार रुपय खर्चा करने होंगे। अब अगर हम इस व्यापार में कमाई की बात करे, तो इसमें हम दो तरह से कमाई कर सकते है एक तुलसी के बीज बेचकर और दूसरा तुलसी का तेल बेचकर. तुलसी का तेल इसकी पत्तियों से तैयार किया जाता है. अगर आप इसकी उपज का अंदाजा लगाना चाहते है तो इसमें आप लगभग एक हेक्टेयर जमीन में लगभग डेढ़सौ किलोग्राम के आस पास बीज और दौसों किलोग्राम के आस पास तुलसी का तेल प्राप्त कर सकते है. इसके बीज की लगभग कीमत 200 रुपय किलोग्राम है वही इसका तेल 700 से 800 रुपय प्रतिलिटर बिकता है. अगर हम इस तरह से अंदाजा लगाए तो इस खेती में एक वर्ष मे लगभग 2 से 2.5 लाख रुपय की कमाई संभव है.

★ तुलसी के फायदे :–

वैसे तो तुलसी के बहुत से लाभ है जो हमें हमारी होने वाली बीमारियों से बचाता है :–

● बुखार, कफ और गले में इन्फ़ैकशन को ठीक करता है ।

● जीवन मे हो रहे है तनावों को कम करता है।
● किडनी में हुई पथरी को दूर करने में भी मदद करती है.
● हृदय सम्बंधित रोगों मे भी बहुत लाभदायक है।
● कैंसर के इलाज़ मे भी काफ़ी मददग़ार है।
● जो लोग स्मोकिंग छोड़ना चाहते है, उनको भी बहुत मदद करता है।
● तुलसी बॉडी मे शुगर लेवल को भी कम करता है।
● बालों और त्वचा को स्वस्थ रखने में भी सहायक है.

★ भारत में तुलसी के प्रकार :–

भारत में तुलसी मुख्यतः दो तरह की होती है :—
● काली तुलसी :– ये तुलसी गहरे रंग की होती है और जिसमें पर्पल रंग के फूल होते है उसे कृष्ण या काली तुलसी कहते है.

● राम तुलसी :– इस तुलसी में हरे रंग के पत्ते होते है और काले रंग की मंजरी होती है तो उसे श्री तुलसी या राम तुलसी कहते है.

★ तुलसी की खेती के लिए आवश्यक जलवायु :—

तुलसी के पौधें के लिए बहुत ज़्यादा ठंडे जगह या मौसम की बिल्कुल भी ज़रूरत नही है। तुलसी गर्म मौसम मे उगने वाला पौधा है। वैसे तो ये हर मौसम और जलवायु मे एडजस्ट हो जाता है । लेकिन यदि इसके फ़ायदे की बात करें तो ये बहुत ज़्यादा ठंड या पाला बिल्कुल नही सह सकता है।

★ तुलसी की खेती के लिए आवश्यक मृदा और जमीन तैयार करना :—-

तुलसी का पौधा उगाने के लिए सामान्य मिट्टी कक ज़रूरत होती है। ऐसी मिट्टी का चुनाव करें जिसमें पानी अच्छी तरह से निकल जाएं। अगर आप खेतों मे इसको उगाने की सोच रहे है तो सबसे पहले खेत को जोत ले और उसे समतल कर ले। समतल करने के बाद आप सिंचाई और क्यारियाँ बनवा कर खेत तैयार कर ले। इसकी खेती के लिए सबसे सही टाइम ये है कि फरवरी मे नर्सरी को तैयार करवाये और अप्रैल मे इनकी बुआई करवा लें। क्योंकि जून जुलाई मे ये फ़सल बरसात के मौसम मे तेजी से विकसित होती है।
आप इनको सीधे खेतों मे न रोपवा कर पहले इसकी नर्सरी मे पौध को तैयार करवा लें।

★ तुलसी की खेती की संपूर्ण प्रक्रिया निम्न है –

● पौधे तैयार करना – 1 हेक्टेयर खेत मे 200 से 300 ग्राम बीजों से बने पौधे लगाएं। पौधे तैयार करने के लिए बीज को जमीन से 2 से 3 सेंटीमीटर नीचे बोना होगा.बीज बोने के बाद 8 से 12 दिन बाद इसमें से पौधे निकल आते है,लेकिन रोपाई के लायक पौधे जो 4 से 5 पत्ति वाले पौधे कम से कम 6 हफ़्तों में पूरी तरीक़े से तैयार होते है.

● खेत में रोपाई करना – अब आपके पौधे रोपाई के लायक हो गए है आपको ध्यान देना होगा कि हर क्यारी में प्रत्येक लाइन में कम से कम 45 सेंटी मीटर की दूरी हो और प्रत्येक पौधे के बीच भी कम से कम 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी होना अनिवार्य है, तभी पौधे का संपूर्ण विकास संभव है.

● खाद और उर्वरक – तुलसी की खेती दवाई बनाने के लिए की जा रही है तो ध्यान रहें कि ज्यादा खाद और रसायनिक उर्वरक का उपयोग ना किया जाना ही बेहतर है. आप बेहतर परिणाम के लिए जैविक खाद का प्रयोग कर सकते है. जैविक खाद में इस फसल के लिए आपके पास गोबर से बनी खाद और वर्मी कंपोस्ट अच्छे ऑप्शन है। 1 एकड़ खेत में 10 से 15 टन गोबर की खाद सही रहती है, वही यदि आप वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करते है, तो एक एकड़ खेत में 5 टन खाद पर्याप्त होती है.

● सिंचाई – पहली सिंचाई आपको पौधें रोपे जाने के तुरंत बाद करनी चाहिए। उसके बाद जैसे जैसे मिट्टी पानी माँगती है वैसे सिंचाई करें। बरसात के मौसम में यदि बरसात होती रहे, तो इसमें सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती, परंतु गर्मी के मौसम में इसमें महीने में 3 से 4 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है.

● निराई गुड़ाई: – तुलसी की खेती में पहली निराई गुड़ाई पौधे रोपने के 1 महीने बाद करना चाहिए, वही 3 से 4 हफ़्तों बाद दूसरी बार निंदाई गुडाई करना आवश्यक है.

● कटाई – 3 महीने बाद आपके पौधे काटने लायक हो जाएंगे बस ध्यान ये दे कि पौधों मे फूल लगे हो और नीचे की पत्तियां पीली हो चुकी हो। पौधो की कटाई करते वक़्त 25 से 30 सेंटीमीटर ऊपरी शाखाओ का चयन कर कटाई करना होता है.

★ तुलसी की फसल को मार्केट में कैसे बेचे :–

आप चाहे तो इस फसल को डाइरैक्ट मार्केट में या मंडी में बेच सकते है और लाभ कमा सकते है. इसके अतिरिक्त आप सीधे किसी कंपनी के लिए भी फ़ार्मिंग कर उन्हे अपना माल सप्लाइ कर सकते है. अगर आप इस विकल्प का चयन करते है तो आपको मार्केट तक जाकर बाजार में अपनी फसल बेचने की कोई आवश्यकता नहीं होती बल्कि कंपनी आपके खेतो में आकर आपकी फसल खुद लेती है और आपको उसका उचित मूल्य प्रदान करती है.

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