Skip to content

THE GYAN GANGA

Know Everythings

  • Home
  • Health
  • Knowledge
  • Biography
  • Tourist Place
  • WEIGHT LOSS
  • Home Remedies
  • Politics
  • Toggle search form
  • Discover the Best Shawn Wayans Quotes Uncategorized
  • Top things you Can not do in singapore..
    Top things you Can not do in singapore.. Tourist Place
  • Discover Inspiring Abdallah II Quotes Quotes
  • Ernesto Che Guevara Biography : Che Guevara in Hindi
    Ernesto Che Guevara Biography : Che Guevara in Hindi History
  • फास्ट फूड या जंक फूड के नुकसान | यंग इंडिया हो रहा है बीमार Health
  • Discover Inspiring Tyra Banks Quotes Quotes
  • ★ चौसा का युद्ध : मुग़लो का देश निकाला ★
    ★ चौसा का युद्ध : मुग़लो का देश निकाला ★ History
  • Central Information Commission Uncategorized
चेचक: पूरी जानकारी “रोग है न ही  कोई माता

चेचक: पूरी जानकारी “रोग है न ही कोई माता

Posted on April 13, 2019April 8, 2024 By admin


चेचक/चिकन पॉक्स/छोटी माता या शीतला सभी एक ही रोग है, जो छुआछुत का रोग है। रोगी को छूने से या उसके कपडे आदि पहनने से चिकन पॉक्स/चेचक एक से दुसरे को हो जातिही । चिकन पॉक्स/चेचक की फुंसियों के खुरंड हवा द्वारा इधर-उधर उड़कर रोग फैलाते हैं । इसलिए इस रोग से बचने का प्रबंध होना चाहिए। लेकिन सभी प्रान्त के रहने वाले हिन्दू चेचक को रोग न मानकर शीतला नामक माता का प्रकोप मानते हैं इलसिए चेचक की दवा न करके झाड़-फूंक ही अधिकतर करते हैं । लेकिन चेचक छूत से लगने वाला रोग हैं

छोटी माता जिसे चेचक भी कहा जाता हैं वह जीवन में प्राय: एक ही बार निकलती हैं । बूढ़े और जवानों को यह कम होती है । बालकों को चिकन पॉक्स/चेचक अधिक होती हैं । ठन्डे देश के निवासी गोरों तथा आदिवासियों को चेचक सबसे ज्यादा तकलीफ देती हैं । चेचक होने पर गोरे तथा आदिवासी बहुत कम बचते हैं । यह रोग अधिकतर बसंत ऋतु आने पर फरवरी-मार्च में फैलता हैं

चेचक एक संक्रमणीय बीमारी है जिसके परिणामस्वरूप लाल धब्बे, छाले या रेश होते है। यह पूरे शरीर में फैलता है। गर्भवती महिलाओं, किशोरों, वयस्कों और नवजात बच्चों को संक्रमण से लड़ने में कठिनाई होती है। बच्चों को चेचक के साथ जोखिम नहीं है। एक बच्चा जो संक्रमित हो गया है उसे स्कूल से दूर रहना चाहिए और अन्य जो कभी संक्रमित नहीं हुए हैं। इस बीमारी की पुनरावृत्ति के लिए यह बहुत ही असंभव है, भले ही वायरस ठीक होने के बाद सिस्टम में वायरस रहता है। यदि यह फिर से सक्रिय हो जाता है, तो यह शिंगल का कारण बन सकता है जो एक संक्रमण है जो दर्दनाक है

Chechak me Kya Khana Chahiye चेचक में क्या खाएं 

  • चूंकि भूख का न लगना चेचक की एक सामान्य लक्षण है, इससे आम तौर पर निर्जलीकरण भी हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिए, और कुछ आवश्यक पोषक तत्वों को लेने के लिए, सुनिश्चित करें कि मरीज को प्रतिरक्षा को मज़बूत करने वाला ढेर सारा रस उसके शरीर को मिल रहा हो
  • निश्चित रूप से, जब आप को चेचक हो तो फलों का सेवन बढा दें। जैसा कि बताया गया है, आपके शरीर को इस बीमारी से उभरने के लिए विषाणु से लड़ना और उसे मरना परता है! ये आपका कर्त्तव्य है की आप शरीर को पौष्टिक भोजन जैसे अंगूर, केले, सेब, खरबूजे आदि जैसे नरम फलों से पूरक करें। आप के मुँह और गले में फफोले हो सकते हैं जिससे अनार या नारंजी का सेवन दुःख दायक हो सकता हैं। इन फलों का मिल्कशेक या जूस बना लें और हर थोड़े थोड़े समय पे पीते रहें।
  • पूरे दिन दही की अच्छी मात्रा लें। न केवल दही कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स प्रदान करता है, यह त्वचा की अच्छी तरह से उपचार करने में भी मदद करता है।
  • सुबह सबसे पहले एक गिलास नर्म नारियल पानी पिये। यह भी महत्त्वपूर्ण विटामिन और खनिजों से भरा होता है, शून्य कैलोरी होने की वजह से ये शरीर को डंडा और प्रतीक्षा प्रणाली को मज़बूत बनता है।
  • दोपहर और रात्रिभोज दोनों के साथ एक कप दाल लें। टमाटर और नमक के साथ कुछ तूर या मूंग दाल को उबालें। अगर आप चाहें तो एक चुटकी हल्दी भी डाल सकते हैं। ताजी धनिया के पत्तों के साथ गार्निश करें और सूप की तरह लें
  • संतरे और अन्य खट्टे फल प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए उत्कृष्ट हैं। रोज़ एक गिलास ओरेंज जूस स्वास्थ्य के लिए उचित माना जाता है। एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आपको जूस में मिलाय जाने वाले योजक (एडिटिव्स) से दूर रहना चाहिए। प्राकृतिक फल और सब्जी का रस इस समय आपके लिए सबसे अच्छा है
  • ताजी सब्जियां और कच्चे फल लेना उचित है। तुलसी और कैमोमाइल जैसे हर्बल चाय भी इसमें मदद करती है। अन्य खाद्य पदार्थ जैसे गाजर, काजू, टोफू, अखरोट, अंडे, अदरक, लहसुन, चुकंदर और ब्लू बेरी भी इस में मददगार होते हैं। कच्चे फल और सब्ज़ी की सेवन करने की सलाह दी जाती है
  • बहुत पानी वाले आहार का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है क्योंकि शरीर इस तरह के आहार को आसानी से पचाने और उनमें पोषक तत्वों को आसानी से संसाधित कर देता है। ककड़ी, टमाटर, पालक तरबूज, कीवी, अंकुरित आहार, और पानी समृद्ध पदार्थ की श्रेणी में आते हैं

Chechak me kya parhej kare चेचक रोग में क्या परहेज करे

  • चेचक में डेयरी उत्पाद, मांस, रोटी या किसी अन्य प्रकार के भारी भोजन – जो पचाने में मुश्किल होते हैं – से परहेज़ करना चाहिए। प्रसंस्कृत (रिफाइंड) और जंक फूड से दूर रहें। शरीर को देने लायक उनमें कम या कोई पौष्टिक पदार्थ नहीं होते। रेड मांस और तले हुए भोजन या अन्य इसी तरह तैयार किए गए खाद्य पदार्थों से भी बचना चाहिए।
  • अपने भोजन में सख्ती से किसी तेल या मसाले का प्रयोग न करें। न ही स्वाद के लिए थोड़ा भी लाल मिर्च पाउडर का प्रयोग करें ये आपके मुंह और गले के फफोले को जला और खुजली उत्पन्न का सकता हैं।
  • चेचक में पाचन तंत्र आम तौर पर धीमा होता है और आपको चेचक के पहले कुछ दिनों में कुछ भी खाने का मन नहीं कर सकता है। इसलिए जी मिचलाना और उलटी से बचने के लिए तेल का इस्तेमाल न करें साथ ही सामान्य वसा-मुक्त खाद्य पदार्थों को पचाना भी आसान होता है और कोई अम्लता संबंधित समस्याएँ नहीं होती।
  • चेचक के दौरान मांस और अंडे से बचना अच्छा होता है। वे प्राकृतिक रूप से फैटी होते हैं और शरीर उन्हें आसानी से पचा भी नहीं पता।
  • अतिरिक्त शक्कर वाले खाद्य पदार्थों से बचे, या अधिक काबोर्हाइड्रेट वाले भोजन जैसे रोटी, पास्ता, कच्चा बादाम और बीज, क्योंकि ये इलाज को धीमा कर देता है।
  • संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थ सूजन पैदा कर सकते हैं, जो खीजे हुए क्षेत्र को ठीक होने में विलम्बित कर सकते हैं।

Symptoms of Chickenpox चेचक के लक्षण

  1. लाल, उभरे दोदरे से आरंभ होना
  2. दोदरे फफोलों में बदलना, मवाद से भरना, फूटना और खुरदरे पड़ना
  3. प्रमुख रूप से चेहरे, खोपड़ी और रीढ़ पर दिखाई देते हैं तथापि भुजाओं, टांगो पर भी यह होते हैं
  4. तेज खुजली हो सकती है
  5. कमर में तेज दर्द हो सकता है
  6. सीने में जकड़न होना
  7. हलका सा बुखार होना स्वाभाविक है

चेचक के मिथक

सोसायटी में छोटी माता के नाम से प्रचलित चिकन पॉक्स का डॉक्टरी इलाज कराने से लोग बचते हैं. इसके पीछे माता का डर छिपा रहता है. लोग झाड़-फूक, और पुरानी मान्यताओं का सहारा लेते हैं. इस दौरान संक्रमण फैलने के चांसेज बढ़ जाते हैं और मरीज के शरीर से वायरस का असर खत्म होने में सात से दस दिन का समय लगता है. अगर समय से इलाज कराया जाए तो बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है.

चिकन पॉक्स से छुटकारा कैसे पाए

चिकित्सक सलाह देते हैं कि चिकन पॉक्स के निवारण के लिये 12 से 15 महीनों की उम्र के बीच बच्चों को चिकन पॉक्स का टीका और 4 से 6 वर्ष की उम्र के बीच बूस्टर टीका लगवा लेना चाहिये। यह टीका चिकन पॉक्स के हल्के संक्रमण को रोकने के लिये 70 से 80 प्रतिशत असरदार होता है और गंभीर रूप से संक्रमण को रोकने के लिये 95 प्रतिशत असरदार होता है। इसीलिए हालांकि कुछ बच्चों ने टीका लगवा लिया होता हैं फिर भी उनमे इस रोग से ग्रसित होने के लक्षण सौम्य होते हैं, बनिबस्त उन बच्चों के जिन्होंने यह टीका नहीं लगवाया होता है

चिकन पॉक्स का देशी उपचार

दानों में होने वाली खुजली से बचने के लिए 2 लीटर पानी में 2 कप जई का आटा मिलाकर लगभग 15 मिनट तक उबालें, पके आटे को एक कॉटन के बैग में अच्छी तरह से बांधकर बॉथ टब में डालकर बच्चे को नहलाएं

  • आधा कप भूरे सिरके को पानी में डालकर नहाने से शरीर में हो रही खुजली से निजात पाई जा सकती है
  • नींबू का रस, सब्जी और अन्य फलों का जूस भी चिकन पॉक्स में राहत देता है
  • नीम की पत्तियों को गर्म पानी में डालकर नहाने से खुजली समाप्त होती है
  • विटामिन-ई युक्त तेल को शरीर पर लगाइए, राहत मिलेगी
  • चिकन पाक्स में गाजर बहुत लाभकारी होता है. उबले गाजर और धनिया को खाने से चिकन पाक्स से आई कमजोरी को कम किया जा सकता है
  • संक्रामक होने की वजह से चिकन पॉक्स पहले तेजी से फैलती थी इसलिए लोग इसे देवी प्रकोप मानते थे. लेकिन, अब इसके वायरस की खोज हो चुकी है और 72 घंटों के भीतर इलाज शुरू करने से संक्रमण और लक्षणों के फैलने पर भी रोक लगती है. इसलिए शुरुआती लक्षणों की पहचान के बाद डॉक्टरी सलाह जरूर लेनी चाहिए
  • घाव को ढक कर रखें। हवा लगने से घाव भरने में तेज़ी आ सकती है, लेकिन पट्टियां घाव को साफ रखती हैं और हानिकारक जीवाणुओं से बचाव करती हैं। बहते हुए फफोले में संक्रमण जल्दी होता है। उन्हें ढक कर रखें जब तक उन पे पपड़ी न जम जाए
  • ड्रैसिंग बदले। एक दिन में कम से कम एक बार या जब भी ड्रैसिंग गीला या गंदे हो जाये को बदले इससे संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है। यदि आप को पट्टियों में इस्तेमाल किये जाने वाले गोंद से एलर्जी है तो गोंद-मुक्त पट्टियों या विसंक्रमित पट्टी और पेपर टेप का इस्तेमाल करें
  • ख़ूब पानी पीजिये। चेचक में निर्जलीकरण महत्त्वपूर्ण लक्षणों में से एक है! सुनिश्चित करें कि पानी उबला हुआ और कमरे के तापमान पर ठंडा किया हो। किसी के साथ अपना ग्लास या पानी की बोतल साझा न करे
  • छाले के बहार आते ही उन पे नारियल का तेल लगाए। चेचक के पस को उंगलियों पे लगने से बचने के लिए एक रुई की कली से छालों पे तेल लगाए।
  • खरोंच करते समय त्वचा में बैक्टीरिया को स्थनांतरित करने से बचने के लिए नियमित रूप से उँगली के नाखूनों को साफ़ और काट के रखें
  • बेकिंग सोडा, समुद्री नमक या जड़ी बूटियों जैसे कैमोमाइल, जई, या आवश्यक तेलों जैसे लैवेंडर, चाय के पेड़ की कुछ बूंदों के साथ गुनगुने पानी से स्नान करें। सेब के सिरके को खुजली से तुरन्त राहत देने के लिए स्नान के पानी में इस्तेमाल किया जा सकता है
  • एक कटा गाजर और एक कप कटा हुआ धनिया पत्ता को दो कप पानी में उबाल लें। पानी को छान लें और दिन में एक बार सूप के रूप में इसे पिये

चेचक के दाग हटाने के उपाय

नींबू:

चिकनपॉक्स के दौरान शरीर पर निकले दानों के दाग को हटाने के लिए नींबू बहुत असरकारक है। रोज नींबू को दागों पर रगडे़ं और इसके बाद चेहरा धो लें। धीरे-धीरे ये दाग के निशान साफ होते चले जाएंगे

शहद:

शहद से भी चिकनपॉक्स के बाद होने वाले दागों को हटाया जाता है। इसके लिए शहद को दाग पर लगाएं और कुछ देर बाद पानी से धो लें। रोजाना दिन में 2-3 बार इसका इस्तेमाल करने से दाग सही हो जाते हैं

लहसुन:

चिकनपॉक्स के बाद होने वाले दाग को हटाने के लिए लहसुन की कुछ कलियों को पीसकर इसका रस निकालें। इसके बाद इसे दिन में 2-3 बार दाग पर लगाएं। इससे दाग साफ होने लगते हैं

टमाटर:

शरीर पर निकले दागों को साफ करने के लिए टमाटर का उपयोग कर सकते हैं। टमाटर के प्लप को दागों पर लगाएं और सूखने के बाद धो लें। प्रतिदिन ऐसा करने से करने से दाग साफ हो जाते हैं

पपीता:

चिकनपॉक्स के दाग हटाने के लिए एक कप पपीता लें उसमें पांच चम्मच शक्कर और पांच चम्मच दूध डालें। इसका पेस्ट बनाने के बाद दाग पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। फिर पानी से साफ कर लें। इससे दाग ठीक हो जाएंगे

चन्दन:

चन्दन से चेचक के दाग आसानी से मिट जाते है। इसके लिए चन्दन पाउडर में ओलिव आयल मिलाएं और इसे दाग पर लगाए। रोज इसका इस्तेमाल करने से दाग ठीक होने लगते हैं।

नारियल तेल:

नारियल तेल चिकनपॉक्स के दाग निकालने में बहुत मदद करता है। नारियल तेल दाग पर लगाकर मसाज करें। रोज 4-5 बार करने से दाग ठीक हो जाते हैं।

एलोवेरा:

एलोवेरा जैल को दाग पर लगाने के बाद मसाज करें। रोज ऐसा करने से दाग के निशान साफ हो जाते हैं

Health

Post navigation

Previous Post: क्या है डीटिंग के फायदे और नुकसान
Next Post: statue of liberty facts in hindi

Related Posts

  • जंक फ़ूड खाने से होने वाले नुकसान : Junk Food Khane ke Nuksan in Hindi
    जंक फ़ूड खाने से होने वाले नुकसान : Junk Food Khane ke Nuksan in Hindi Health
  • फुट कोर्न क्या होता है कैसा इसे छुटकारा पाया जा सकता है ?
    फुट कोर्न क्या होता है कैसा इसे छुटकारा पाया जा सकता है ? Health
  • पीरियड्स मे रखें इन बातों का ख़्याल, रिलैक्स रहें:—-
    पीरियड्स मे रखें इन बातों का ख़्याल, रिलैक्स रहें:—- Health
  • World Cancer Day: कैंसर के प्रति जागरूकता होती है सबसे सफल इलाज, जानें इस जोखिम से कैसे बचें Health
  • दाद खाज खुजली ठीक करने के आयुर्वेदिक नुस्खे
    दाद खाज खुजली ठीक करने के आयुर्वेदिक नुस्खे Health
  • Amla Khane ke Fayde aur Nuksan | रोज एक आंवला खाने के फायदे
    Amla Khane ke Fayde aur Nuksan | रोज एक आंवला खाने के फायदे Health

  • Home
  • Health
  • Knowledge
  • Biography
  • Tourist Place
  • WEIGHT LOSS
  • Home Remedies
  • Politics
  • Home
  • Health
  • Knowledge
  • Biography
  • Tourist Place
  • WEIGHT LOSS
  • Home Remedies
  • Politics
  • Discover Inspiring Steve Wozniak Quotes Quotes
  • khansi ka ayurvedic dawa | khansi ke gharelu upay
    khansi ka ayurvedic dawa | khansi ke gharelu upay Health
  • Central Vigilance Commission Uncategorized
  • Respiration in Plants and Humans Uncategorized
  • जानिए हरे प्याज खाने के फायदे ? इसके इस्तेमाल से स्वास्थ्य को मिलनेवाले अनगिनत फायदे जानिए Health
  • ★ बनारसी खाना :: तीखा और चटपटा | Famous Food in Bananas
    ★ बनारसी खाना :: तीखा और चटपटा | Famous Food in Bananas Health
  • जानिए ग्रीन टी पीने के फायदे : Green Tea सेहत को रखे ग्रीन
    जानिए ग्रीन टी पीने के फायदे : Green Tea सेहत को रखे ग्रीन Health
  • ◆ क्या होता है 4K वीडियो ◆
    ◆ क्या होता है 4K वीडियो ◆ Knowledge

Powered by PressBook News WordPress theme