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कैसे होता है भारत के राष्ट्रपति का चुनाव और कौन कौन देता है मत (वोट) ?

कैसे होता है भारत के राष्ट्रपति का चुनाव और कौन कौन देता है मत (वोट) ?

Posted on December 19, 2019April 8, 2024 By admin

राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल, जिसे इलेक्टोरल कॉलेज भी कहा जाता है, करता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचकगण के सदस्य करेंगे जिसमें–

(क) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य; और

(ख) राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य, होंगे

इलेक्टोरल कॉलेज में इसके सदस्यों का आनुपातित प्रतिनिधित्व होता है। यहाँ पर उनका एकल मत हस्तानांतरित होता है, पर उनकी दूसरी पसंद की भी गिनती होती है। इस प्रक्रिया को सिंगल वोट ट्रान्सफरेबल सिस्टम या एकल संक्रमणीय मत पद्धति कहते हैं।

निर्वाचन प्रक्रिया: राष्ट्रपति के निर्वाचन पद्धति के सम्बन्ध में संविधान के अनुच्छेद 55 में प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचन में दो सिद्धान्तों को अपनाया जाता है

अनुच्छेद 55 के खण्ड (1) तथा (2) में वर्णित हैं, के अनुसार राज्यों के प्रतिनिधित्व के मापदंड में एकरूपता तथा सभी राज्यों और संघ के प्रतिनिधित्व में समतुल्यता होगी। इस सिद्धान्त का तात्पर्य यह है कि सभी राज्यों की विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व का मान निकालने के लिए एक ही प्रक्रिया अपनायी जाएगी तथा सभी राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्य का योग संसद के सभी सदस्य के मत मूल्य के योग के समतुल्य अर्थात् समान होगा। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मतमूल्य तथा संसद के सदस्यों के मतमूल्य को निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाएगी।

विधानसभा के सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण

प्रत्येक राज्य की विधानसभा के सदस्य के मतों की संख्या निकालने के लिए उस राज्य की कुल जनसंख्या (जो पिछली जनगणना के अनुसार निर्धारित है) को राज्य विधानसभा की कुल निर्वाचित सदस्य संख्या से विभाजित करके भागफल को 1000 से विभाजित किया जाता है। इस प्रकार भागफल को एक सदस्य का मत मूल्य मान लेते हैं। यदि उक्त विभाजन के परिणामस्वरूप शेष संख्या 500 से अधिक आये, तो प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या में एक और जोड़ दिया जाता है। राज्य विधान सभा के सदस्यों का मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–

राज्य की विधानसभा के एक सदस्य का मत मूल्य = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित X 1 / 1000 सदस्यों की कुल संख्या

संसद सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण -संसद सदस्य का मत मूल्य निर्धारित करने के लिए राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्यों को जोड़कर संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के योग का भाग दिया जाता है। संसद सदस्य का मत मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है

संसद सदस्य का मत मूल्य = कुल राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्यों का योग / संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों का योग

इस प्रकार राष्ट्रपति के चुनाव में यह ध्यान रखा जाता है कि सभी राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग संसद के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग बराबर रहे और सभी राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक समान प्रक्रिया अपनायी जाए

क्या है एकल संक्रमणीय मत पद्धति ?

इस पद्धति का तात्पर्य है कि यदि निर्वाचन में एक से अधिक उम्मीदवार हों, तो मतदाताओं द्वारा मतदान वरीयता क्रम से दिया जाए। इसका आशय यह है कि मतदाता मतदान पत्र में उम्मीदवारों के नाम या चुनाव चिह्न के समक्ष अपना वरीयता क्रम लिखेगा

जनता अपने राष्ट्रपति का चुनाव सीधे नहीं करती, बल्कि उसके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि करते हैं। चूँकि जनता राष्ट्रपति का चयन सीधे नहीं करती है, इसलिए इसे परोक्ष निर्वाचन कहा जाता है

उल्लेखनीय यह है कि राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य, राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाल सकते हैं

राष्ट्रपति के चुनाव के बाद उसी व्यक्ति को निर्वाचित घोषित किया जाता है, जो डाले गये कुल वैध मतों में से आधे से अधिक मत प्राप्त करे

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