Skip to content

THE GYAN GANGA

Know Everythings

  • Home
  • Health
  • Knowledge
  • Biography
  • Tourist Place
  • WEIGHT LOSS
  • Home Remedies
  • Politics
  • Toggle search form
  • ऐलेक्ज़ैन्डर ग्राहम बेल जीवनी
    ऐलेक्ज़ैन्डर ग्राहम बेल जीवनी Biography
  • अजवाइन के फायदे और नुकसान | Benefit of Eating Ajwain
    अजवाइन के फायदे और नुकसान | Benefit of Eating Ajwain Health
  • शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के लक्षण, कारण, इलाज Health
  • तुलसी की खेती करें :- तेल या बीज बेचे दोनों मे मुनाफ़ा :—
    तुलसी की खेती करें :- तेल या बीज बेचे दोनों मे मुनाफ़ा :— Uncategorized
  • Discover Inspiring Samuel Adams Quotes Quotes
  • ■  फ़िल्म शोले के लेखक जावेद अख़्तर का जीवन परिचय ■
    ■ फ़िल्म शोले के लेखक जावेद अख़्तर का जीवन परिचय ■ Biography
  • जंक फ़ूड खाने से होने वाले नुकसान : Junk Food Khane ke Nuksan in Hindi
    जंक फ़ूड खाने से होने वाले नुकसान : Junk Food Khane ke Nuksan in Hindi Health
  • देवी लाल जीवनी | Chaudhary devi lal Biography in hindi
    देवी लाल जीवनी | Chaudhary devi lal Biography in hindi Biography
★ खिलजी ने जला दिया था ये विश्वविद्यालय :—–

★ खिलजी ने जला दिया था ये विश्वविद्यालय :—–

Posted on December 2, 2019April 8, 2024 By admin

प्राचीन भारत में नालंदा विश्वविद्यालय उच्च् शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विश्व विख्यात केन्द्र था. यह दुनिया का सबसे पुराने विश्वविद्यालय में से एक है. जब से भारत मे बौद्धकाल का समय रहा तब से शिक्षा का बहुत तेजी से विकास हुआ । बौद्ध के अनुयायियों ने यहाँ तीन बौद्ध विश्‍वविद्यालय की नींव रखी थी। विक्रमशिला, तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय के नाम से ये विश्वविद्यालय देश ही नही पूरे विश्व मे अपनी पहचान बनाई। इन्हीं तीनों मे से एक नालंदा विश्वविधालय के इतिहास के बारे मे हम आज चर्चा करेंगे। तो आइए चलते है नालंदा विश्वविद्यालय की यात्रा पे !!!!

बिहार की राजधानी पटना से करीब 120 किलोमीटर दक्षिण-उत्तर में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय है। इसके होने के संकेत आज भी यहाँ पे देखे जा सकते है। यह भारत में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विश्वविख्यात केंद्र था। महायान बौद्ध धर्म के इस शिक्षा-केंद्र में हीनयान बौद्ध धर्म के साथ ही अन्य धर्मों के तथा अनेक देशों के छात्र पढ़ते थे। यहां धर्म ही नहीं, राजनीति, शिक्षा, इतिहास, ज्योतिष, विज्ञान आदि की भी शिक्षा दी जाती थी।

नालंदा संस्कृत शब्‍द नालम्+दा से बना है। संस्‍कृत में ‘नालम्’ का अर्थ ‘कमल’ होता है। कमल ज्ञान का प्रतीक है। नालम्+दा यानी कमल देने वाली, ज्ञान देने वाली।

कौन थे इस विश्वविद्यालय के बनाने वाले :—

इस विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त काल के शासक कुमारगुप्त ने की थी। गुप्त वंश के पतन के बाद भी आने वाले सभी शासक वंशों ने इसके संरक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान जारी रखा और बाद में इसे महान सम्राट हर्षवर्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण मिला। स्थानीय शासकों तथा विदेशी शासकों से भी इस विश्वविद्यालय को अनुदान मिलता था।

इस विश्वविद्यालय मे अनगिनत किताबों की संख्या और हर विषय से जुड़ी हुई किताबों का संग्रह होने के कारण इसे देश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय होने का गौरव प्राप्त था । यहां इतनी किताबें रखी थीं कि जिन्हें गिन पाना आसान नहीं था। हर विषय की किताबें इस विश्वविद्यालय में मौजूद थीं।

कैसे पहचान हुई की यही है नालन्दा विश्वविद्यालय :—

7वीं शताब्दी में जब चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया था तो उन्होंने अपने लेख मे विश्वविद्यालय का जिक्र किया है। उनके लेखों के आधार पर ही इन खंडहरों की पहचान नालंदा विश्वविद्यालय के रूप में की गई थी। ह्वेनसांग ने पढ़ाई भी की और यहाँ वे रहके उन्होंने विश्वविद्यालय मे पढाया भी।

यहाँ होती थी मुफ़्त पढ़ाई :—

नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा, आवास, भोजन आदि का कोई भी पैसा छात्रों से नहीं लिया जाता था। सभी सुविधाएं मुफ़्त थीं। विश्वविद्यालय को उस समय के राजाओं और अमीर व्यापारियों से जो दान मिलता था , उससे विश्वविद्यालय का खर्च चलता था। इस विश्वविद्यालय को लगभग 200 गाँवो के कमाई के बराबर दान मिलता था।

बौद्ध धर्म से इस शिक्षण संस्थान के प्रमुखता से जुडे होने के पश्चात भी यहां हिन्दू तथा जैन मतों से संबंधित अध्ययन कराए जाने के संकेत मिलते हैं, साथ ही साथ वेद, विज्ञान, खगोलशास्त्र, सांख्य, वास्तुकला, शिल्प, मूर्तिकला, व्याकरण, दर्शन, शल्यविद्या, ज्योतिष, योगशास्त्र तथा चिकित्साशास्त्र भी पाठ्यक्रम में शामिल थे। इससे पता चलता है कि बौद्ध शासन होने के बावजूद बौद्धों ने कभी दूसरे धर्मों के अनुयायियों के साथ भेदभाव नहीं किया था।

यह प्रथम पूर्णत: आवासीय विश्वविद्यालय था और उस समय इसमें तकरीबन 10,000 विद्यार्थी और लगभग 2,000अध्यापक थे. इसमें शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यार्थी भारत के विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस तथा तुर्की से भी आते थे.

 कैसा था नालन्दा विश्वविद्यालय :—

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का पूरा परिसर एक विशाल दीवार से घिरा हुआ था, जिसमें प्रवेश के लिए एक मुख्य द्वार था। उत्तर से दक्षिण की ओर मठों की कतार थी और उनके सामने अनेक भव्य स्तूप और मंदिर थे। मंदिरों में बुद्ध भगवान की सुंदर मूर्तियां स्थापित थीं, जो अब नष्ट हो चुकी हैं। नालंदा विश्वविद्यालय की दीवारें इतनी चौड़ी हैं कि इनके ऊपर ट्रक भी चलाया जा सकता है।

केंद्रीय विद्यालय में 7 बड़े कक्ष थे और इसके अलावा 300 अन्य कमरे थे। इनमें व्याख्यान हुआ करते थे। कमरे में सोने के लिए पत्थर की चौकी होती थी। दीपक, पुस्तक इत्यादि रखने के लिए आले बने हुए थे। प्रत्येक मठ के आंगन में एक कुआं बना था। 8 विशाल भवन, 10 मंदिर, अनेक प्रार्थना कक्ष तथा अध्ययन कक्ष के अलावा इस परिसर में सुंदर बगीचे तथा झीलें भी थीं। जैन ग्रंथ ‘सूत्रकृतांग’ में नालंदा के ‘हस्तियान’ नामक सुंदर उद्यान का वर्णन है।

मुस्लिम शासक ने जला दिया था विश्वविद्यालय :—-

सन् 1199 में तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने इस विश्वविद्यालय को जला कर पूरी तरह से नष्ट कर दिया। कहते हैं कि यहां के पुस्तकालय में इतनी किताबें थीं कि पूरे तीन महीने तक आग धधकती रही थी। इसके अलावा उसने कई धर्माचार्य और बौद्ध भिक्षुओं को भी मार डाला था।

ये बड़ा दुर्भाग्य रहा की इस विश्वविद्यालय को मुख्य रूप से तीन तीन बार इसको नष्ट करने की कोशिश की गई ।

● पहला विनाश :- इसकी नीव रखने वाले स्कंदगुप्त के शासनकाल के दौरान मिहिरकुल के तहत ह्यून नामक व्यक्ति के कारण इसको तहस नहस किया गया। लेकिन स्कंदगुप्त के उत्तराधिकारीयों ने पुस्तकालय की मरम्मत करवाई और एक बड़ी इमारत के साथ सुधार दिया था.

● दूसरा विनाश :- दूसरी बार इसको 7वीं शताब्दी मे गौदास ने नष्ट करने की कोशिश की लेकिन बौद्ध राजा हर्षवर्धन ने इस विश्वविद्यालय की मरम्मत करवाई थी.

● तीसरा विनाश :— सबसे विनाशकारी हमला 1193 में तुर्क सेनापति इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी और उसकी सेना ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया था. ऐसा माना जाता है धार्मिक ग्रंथों के जलने के कारण भारत में एक बड़े धर्म के रूप में उभरते हुए बौद्ध धर्म को सैकड़ों वर्षों तक का झटका लगा था और तब से लेकर अब तक यह पूर्ण रूप से इन घटनाओं से नहीं उभर सका है.

आख़िर क्यों कि खिलजी ने नालन्दा पे हमला :—

उस समय बख्तियार खिलजी ने उत्तर भारत में बौद्धों द्वारा शासित कुछ क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लिया था और एक बार वह काफी बीमार पड़ा. उसने अपने हकीमों से काफी इलाज करवाया मगर वह ठीक नहीं हो सका और मरणासन्न स्थिति में पहुँच गया. तभी किसी ने उसको सलाह दी कि वह नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्र को दिखाए और इलाज करवाए. परन्तु खिलजी इसके लिए तैयार नहीं था. उसे अपने हकीमों पर ज्यादा भरोसा था. वह यह मानने को तैयार नहीं था की भारतीय वैद्य उसके हकीमों से ज्यादा ज्ञान रखते हैं या ज्यादा काबिल हो सकते हैं. लेकिन अपनी जान बचाने के लिए उसको नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्र को बुलवाना पड़ा. फिर बख्तियार खिलजी ने वैद्यराज के सामने एक अजीब सी शर्त रखी और कहां की में उनके द्वारा दी गई किसी भी प्रकार की दवा नहीं खाऊंगा. बिना दवा के वो उसको ठीक करें. वैद्यराज ने सोच कर उसकी शर्त मान ली और कुछ दिनों के बाद वो खिलजी के पास एक कुरान लेकर पहुंचे और कहा कि इस कुरान की पृष्ठ संख्या.. इतने से इतने तक पढ़ लीजिये ठीक हो जायेंगे.

बख्तियार खिलजी ने वैद्यराज के बताए अनुसार कुरान को पढ़ा और ठीक हो गया था. ऐसा कहा जाता हैं कि राहुल श्रीभद्र ने कुरान के कुछ पन्नों पर एक दवा का लेप लगा दिया था, वह थूक के साथ उन पन्नों को पढ़ता गया और ठीक होता चला गया. खिलजी इस तथ्य से परेशान रहने लगा कि एक भारतीय विद्वान और शिक्षक को उनके हकीमों से ज्यादा ज्ञान था. फिर उसने देश से ज्ञान, बौद्ध धर्म और आयुर्वेद की जड़ों को नष्ट करने का फैसला किया. परिणाम स्वरूप खिलजी ने नालंदा की महान पुस्तकालय में आग लगा दी और लगभग 9 मिलियन पांडुलिपियों को जला दिया.

नालंदा विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :–

– नालंदा शब्द संस्कृत के तीन शब्द ‘ना +आलम +दा’ से बना है. इसका अर्थ ‘ज्ञान रूपी उपहार पर कोई प्रतिबंध न रखना’ से है.

– नालंदा की लाइब्रेरी में तकरीबन 90 लाख पांडुलिपियां और हजारों किताबें रखी हुई थी.

– नालंदा विश्वविद्यालय को दूसरा सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है, तक्षशिला के बाद. क्या आप जानते हैं कि ये 800 साल तक अस्तित्व में रही.

– नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास चीन के ह्वेनसांग और इत्सिंग ने खोजा था. ये दोनों 7वीं शताब्दी में भारत आए थे. इन्होनें इसे दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय भी बताया था.

– इस विश्वविद्यालय में चयन मेरिट के आधार पर होता था और निःशुल्क शिक्षा दी जाती थी. साथ ही उनका रहना और खाना भी पूरी तरह निःशुल्क होता था.

– इस विश्वविद्यालय में तकरीबन 10,000  विद्यार्थी और 2000 अध्यापक थे.

– इस विश्वविद्यालय में भारत ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, ईरान, ग्रीस, मंगोलिया आदि अन्य देशो के छात्र पढ़ने के लिए आते थे.

– नालंदा में ऐसी कई मुद्राएं मिली हैं जिससे ज्ञात होता है कि इसकी स्थापना पांचवी शताब्दी में गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने की थी.

– इस विश्वविद्यालय को बनाने का उद्देश्य ध्यान और आध्यात्म के लिए स्थान को बनाने से था और ऐसा कहा जाता है कि गौतम बुद्ध खुद कई बार यहां आए और रुके भी थे.

– नालंदा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी 9 मंजिल की थी और इसके तीन भाग थे: रत्नरंजक, रत्नोदधि और रत्नसागर. क्या आप जानते हैं कि इसमें ‘धर्म गूंज’ नाम की लाइब्रेरी भी थी.

– इस विश्वविद्यालय में हषवर्धन, धर्मपाल, वसुबन्धु, धर्मकीर्ति, आर्यवेद, नागार्जुन आदि कई अन्य विद्वानों ने पढ़ाई की थी.

– उस समय यहां लिटरेचर, एस्ट्रोलॉजी, साइकोलॉजी, लॉ, एस्ट्रोनॉमी, साइंस, वारफेयर, इतिहास, मैथ्स, आर्किटेक्टर, भाषा विज्ञानं, इकोनॉमिक, मेडिसिन आदि कई विषय पढ़ाएं जाते थे.

– सबसे ख़ास बात इस विश्वविद्यालय की यह थी कि कोई भी फैसला सबकी सहमती से लिया जाता था यानी अध्यापकों के साथ छात्र भी अपनी राए देते थे. यानी यहां पर लोकतांत्रिक प्रणाली थी.

– नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष 1.5 लाख वर्ग फीट में मिले हैं. ऐसा माना जाता है कि ये इस विश्वविद्यालय का सिर्फ 10% ही हिस्सा है.

History

Post navigation

Previous Post: गुजरात की पावागढ़ पहाड़ी : जहाँ सती का गिरा वक्षस्थल
Next Post: पहाड़ों की ट्रेन : दार्जलिंग हिमालय रेलवे स्टेशन

Related Posts

  • ★ हांडा की रानी: सिर काट के सजा दिया थाल मे :—
    ★ हांडा की रानी: सिर काट के सजा दिया थाल मे :— Biography
  • ताजमहल से जुडी कुछ बाते जो आप नहीं जानते होंगे
    ताजमहल से जुडी कुछ बाते जो आप नहीं जानते होंगे History
  • अमरावती शैली की कला शैली
    अमरावती शैली की कला शैली History
  • महाराणा सांगा और बाबर के मध्य का युद्ध | ★  बाबर के हुकूमत की शुरुआत खानवा का युद्ध ★
    महाराणा सांगा और बाबर के मध्य का युद्ध | ★ बाबर के हुकूमत की शुरुआत खानवा का युद्ध ★ History
  • जाने कैसे बना ISIS | किसने बनाया ISIS जैसा खूंखार आतंकवादी संगठन
    जाने कैसे बना ISIS | किसने बनाया ISIS जैसा खूंखार आतंकवादी संगठन History
  • ★अकबर को चुनौती देने वाली रानी : दुर्गावती ★
    ★अकबर को चुनौती देने वाली रानी : दुर्गावती ★ Biography

  • Home
  • Health
  • Knowledge
  • Biography
  • Tourist Place
  • WEIGHT LOSS
  • Home Remedies
  • Politics
  • Home
  • Health
  • Knowledge
  • Biography
  • Tourist Place
  • WEIGHT LOSS
  • Home Remedies
  • Politics
  • सेव खाने के फायदे | हरेक दिन एक सेब खाये | Benefit of Eating Apple
    सेव खाने के फायदे | हरेक दिन एक सेब खाये | Benefit of Eating Apple Health
  • Discover Inspiring Earl Warren Quotes Quotes
  • ★ जनरल टिकट लेकर स्लीपर में यात्रा कैसे करे or क्या करें !
    ★ जनरल टिकट लेकर स्लीपर में यात्रा कैसे करे or क्या करें ! Knowledge
  • वह शक्‍तिपीठ जहां गिरे थे देवी सती के तीनों नेत्र, जानें इसका पूरा इतिहास
    वह शक्‍तिपीठ जहां गिरे थे देवी सती के तीनों नेत्र, जानें इसका पूरा इतिहास Tourist Place
  • नसों में दर्द के लक्षण, कारण, इलाज, दवा
    नसों में दर्द के लक्षण, कारण, इलाज, दवा Health
  • Best Quotes of Mahatma Gandhi Life Quotes
  • ★  जापानी प्रधानमंत्री :— शिंजो आबे :—-
    ★ जापानी प्रधानमंत्री :— शिंजो आबे :—- Biography
  • Unlock Inspiration: Denzel Washington Quotes! Quotes

Powered by PressBook News WordPress theme