इन कानूनी तरीकों से ख़ाली करवा सकते है घर ,मकानमालिक किराएदार से ।

मेट्रों शहरों में निरंतर परिवार छोटे होेते जा रहे हैं जबकि घर बड़े। इन में कोई रहने वाला तक नहीं होता। ऐसी स्थित में घर को किराए पर दे दिया जाता है। घर किराए पर देना जहां किराएदार के लिए आशियाने की तलाश पूरी करता है तो वहीं मकान मालिक के लिए यह कमाई का जरिया भी बनता है। हालांकि घर किराए पर देना तो सरल होता है लेकिन कभी-कभी किराएदार से इसे खाली कराना बेहद मुश्किल। इसलिए घर किराए पर देने से पहले सारे जरूरी पहलुओं पर गौर कर लेना चाहिए।

बेदखली के लिए मुकदमा :

रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किरायेदार के बीच कॉन्ट्रैक्ट होता है. यह अहम दस्तावेज है. इसमें प्रॉपर्टी को किराए पर देने की शर्तें होती हैं. इसमें बताया जाना चाहिए कि किराए पर दी जाने वाली प्रॉपर्टी का कैसे इस्तेमाल किया जाएगा. किरायेदारी की अवधि और हर महीने के किराये का भी साफ जिक्र होना चाहिए.

मकान खाली करने की शर्तें भी लिखी जानी चाहिए ताकि विवाद की स्थिति में इनका इस्तेमाल किया जा सके. इससे आप कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन का हवाला देते हुए मकान खाली कराने का आधार बना सकते हैं.

कानून के जानकार बताते हैं कि किरायेदार से घर खाली कराने के दो तरीके हैं.

रेंट एग्रीमेंट खत्म हो चुका हो.

ट्रांसफर आफ प्रॉपर्टी एक्ट के सेक्शन 106 के तहत कानूनी नोटिस भेजकर मकान मालिक लीज को रद्द कर दे.

दोनों ही मामलों में यदि किरायेदार घर खाली करने से मना करता है तो मकान मालिक को जिला अदालत में बेदखली का मुकदमा दायर कर आदेश लेना पड़ेगा.

किराया नहीं दिया गया है :

कई मामलों में किरायेदार किराया देना रोक देते हैं. लेकिन, प्रॉपर्टी पर कब्जा बनाए रखते हैं. कभी-कभार विवाद का कारण किराये का बढ़ना होता है. मकान मालिक रेंट एग्रीमेंट में तय शर्त के अनुसार किराये को बढ़ा सकता है.

यदि किरायेदार एक साल बाद बढ़ा हुआ किराया देने से मना करता है तो मकान मालिक प्रॉपर्टी को खाली करने के लिए कह सकता है. हालांकि, किराये में मनमानी बढ़ोतरी को किरायेदार देने से मना कर सकता है.

रेंट एग्रीमेंट का उल्लंघन :

रेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले किरायेदार और मकान मालिक दोनों को उसे अच्छी तरह से पढ़ लेना चाहिए. दोनों में से किसी की ओर से उल्लंघन होने पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाता है. प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कैसे होगा, इसका एग्रीमेंट में साफ उल्लेख होना चाहिए.

कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन होने पर मकान मालिक किरायेदार को नोटिस भेज सकते हैं. किसी भी तरह के उल्लंघन की अनदेखी नहीं करनी चाहिए. यदि आपको किरायेदार के व्यवहार के खिलाफ या प्रॉपर्टी से कोई आपराधिक गतिविधि चलाने की शिकायत मिलती है तो यह आपकी जिम्मेदारी होगी. इसलिए बतौर मकान मालिक आपको अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी होनी चाहिए.

रेंट कंट्रोल एक्ट के बारे में जान लें :

किरायेदार के साथ आपके कानूनी रिश्ते होते हैं. जिस राज्य में आप रहते हैं, उस राज्य के कानूनों से ये नियंत्रित होते हैं. अपने राज्य के रेंट कंट्रोल एक्ट को जान लें. इनमें बेदखली की प्रक्रिया का पता लगाएं. यह जानकारी रेंट एग्रीमेंट की ड्राफ्टिंग से पहले ही कर लेनी चाहिए. मकान मालिक को घर खाली कराने के लिए गैर-कानूनी तरीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

यदि किराएदार का अपना मकान है उस शहर मे तो मकानमालिक ख़ाली करने को बोल सकता है :-

यदि किरायेदार का शहर में अपना मकान है, तो मकान मालिक उससे किराये का मकान खाली करा सकता है. किरायेदार इस आधार पर किराये का मकान छोड़ने से मना नहीं कर सकता है कि मकान मालिक को उस मकान की आवश्यकता नहीं है.

आइये एक उदाहरण देखते है :

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस एसपी केशरवानी की एकलपीठ ने यह आदेश मेरठ के मकान मालिक दीपक जैन की याचिका पर दिया है.

दीपक जैन की याचिका पर बहस करने वाले अधिवक्‍ता आशीष कुमार सिंह के अुनसार, मेरठ के मकान मालिक दीपक जैन व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस एसपी केशरवानी की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है. उन्‍होंने बताया कि वेद प्रकाश अग्रवाल याची दीपक जैन के मकान में किराएदार थे. उनकी मृत्यु के बाद परिवार के अन्य सदस्य किराए के मकान में बतौर वारिस रहते रहे. मकान मालिक ने यह कहते हुए मकान खाली करने का नोटिस दिया कि किराएदार के पास शहर में पांच मकान हैं और मकान मालिक को अपने मकान की आवश्यकता है. अधिवक्‍ता आशीष कुमार सिंह ने बताया कि किरायेदारों द्वारा मकान खाली न करने पर मकान मालिक दीपक जैन ने बेदखली वाद अदालत में दायर कर दिया. सुनवाई के बाद अपीलीय अदालत ने अपना फैसला याची के पक्ष में सुनाया, लेकिन अपीलीय अदालत ने यह कहते हुए किराएदार की बेदखली को गलत माना कि मकान मालिक के मकान में 25 कमरे हैं, इसलिए उसे और कमरों की जरूरत नहीं है. मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अपीलीय न्यायालय ने कानून के प्रावधानों के विपरीत आदेश दिया है. इन तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया गया कि किराएदार के पास उसी शहर में पांच मकान हैं. इसलिए मकान मालिक को किराए के मकान को खाली कराने का अधिकार है. कोर्ट ने अपीलीय अदालत के फैसले को रद्द करते हुए मूल वाद में जज ख़फ़ीफा के फैसले की पुष्टि कर दी है.

सरल शब्दों मे समझ्ते है 

मकान मालिक निम्न कारणों से मकान खाली कराने का अधिकारी होता है-

  • यदि किराएदार ने पिछले चार से छह माह से किराया अदा नहीं किया हो।
  • किराएदार ने जानबूझ कर मकान को नुकसान पहुंचाया हो।
  • किराएदार ने मकान मालिक की लिखित स्वीकृति के बिना मकान या उस के किसी भाग का कब्जा किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया हो।
  • यदि किराएदार मकान मालिक के हक से इनकार कर दिया हो।
  • किराएदार मकान का उपयोग किराए पर लिए गए उद्देश्य के अलावा अन्य कार्य के लिए कर रहा हो।
  • यदि किराएदार को मकान किराए पर किसी नियोजन के कारण दिया गया हो और किरायेदार का वह नियोजन समाप्त हो गया हो।
  • किराएदार ने जिस प्रयोजन के लिए मकान किराये पर लिया हो पिछले छह माह से उस प्रयोजन के लिए काम में न ले रहा हो

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